केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन ने कहा कि जब तक बरसात के पानी को एकत्र नहीं किया जाएगा, तब तक रिचार्जिंग की समस्या से निजात नहीं मिलेगी।
उन्हाेंने कहा कि इसके लिए भूमि संरक्षण विभाग द्वारा मेड़बंदी कराई जानी चाहिए। जिससे खेत का पानी खेत में रोका जा सके। लेकिन किसानों के रुचि न लेने के कारण बारिश का पानी नहीं रोका जा रहा है।
वैज्ञानिक गुरुवार को विकासखंड कबरई में जल प्रबंधन एवं भूजल विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के मौके पर बोल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि बुंदेलखंड पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां पर ट्यूबवेल सफल नहीं हैं। इसके बाद भी जगह-जगह हैंडपंप लगाए जाने से पानी में कमी आ रही है।
उन्हाेंने कहा कि बारिश के पानी को किसान हर हालत में बर्बाद होने से बचाएं। इससे जहां जलस्तर बढ़ेगा, वहीं खेतों में नमी रहेगी। जिसके चलते उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।
लखनऊ से आए भू वैज्ञानिक सईद-उल-हक ने कहा कि बुंदेलखंड में जलस्तर बढ़ाने के लिए भू वैज्ञानिकों को लगाया गया है। जो बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में जाकर कार्यशालाएं आयोजित कर जलस्तर बढ़ाने के गुर सिखा रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि खेतों में तालाब बनाकर फसल की सिंचाई की जा सकती है।
साथ ही जलस्तर भी मेनटेन रहेगा। इससे पूर्व कलाकारों ने नाटक और गीत प्रस्तुत कर जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर वैज्ञानिक पीके त्रिपाठी, डॉ. एसके श्रीवास्तव, लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता एसके वर्मा सहित तमाम वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।