असिस्टेंट कमिश्नर राजीव पांडेय ने कहा कि ई-गर्वनेंस को और अधिक प्रभावी ढंग से विभागों के कामकाज में जोड़कर आम व्यापारी को लाभ दिलाने के उद्देश्य से जिले में वैट अधिनियम के सभी कार्य जिले में आनलाइन कर दिए गए हैं। अब व्यापारी को नोटिस भी आनलाइन ही जारी होगी। साथ ही 25 लाख रुपए तक के कारोबार पर व्यापारी को कर निर्धारण नहीं कराना पड़ेगा।
जिले के वाणिज्यकर कार्यालय में आयोजित वैट सरलीकरण योजना की बैठक में असिस्टेंट कमिश्नर व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वाणिज्यकर आयुक्त मृत्युंजय नारायण द्वारा जारी शासनादेश के क्रम में वर्ष 2011-12 के वैट अधिनियम के तहत कर निर्धारण की अंतिम तिथि 31 मार्च नियत कर दी है।
इससे पहले जिले के सभी व्यापारियों को कर निर्धारण की कार्रवाई करानी होगी। ताकि उनके खिलाफ एक पक्षीय पेनाल्टी कर निर्धारण न हो सकें। नए नियमों की जानकारी व्यापारियों को देते हुए उन्होंने बताया कि अब जो भी नए व्यापारी एक अप्रैल 2014 से पंजीकृत हैं।
उन्हें हर माह पहले वर्ष रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। वाणिज्यकर आयुक्त ने प्रदेश में 31 जनवरी तक कुल किए गए कारोबार पर वैट की राशि जमा करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी नियत की गई है। इसके बाद ब्याज के रूप में अर्थदंड देना होगा।
डिप्टी कमिश्नर राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वैट की नई सरलीकृत नीति में व्यापारियों को नया तोहफा शासन ने दिया है। ऐसे पंजीकृत व्यापारी जिनका कारोबार वर्ष भर में 25 लाख तक ही है। उन्हें रिटर्न दाखिल करने के बाद किसी भी प्रकार के कर निर्धारण की कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी। वे स्वत: ही स्वकर निर्धारण की परिधि में आ जाएंगे। उन पर कोई नोटिस विभाग जारी नहीं करेगा।
उन्होंने बताया कि 700 से अधिक ऐसे पंजीकृत व्यापारी जिले में हैं, जो काम नहीं कर रहे उन्हें पिछले वर्षो के आंकडे़ देखकर चिह्नित कर पंजीकरण निरस्त किए जाएंगे।