-इसरो के जरिए जिले में स्थापित हो रहीं 40 स्पेस लैब, माह के अंत तक सभी हो जाएंगी शुरू
-इसरो के वैज्ञानिकों ने स्कूली बच्चों से किया संवाद, सवालों के जवाब देकर अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ने के लिए किया मार्गदर्शन
फोटो 16 एमएएचपी 24 परिचय-उच्च प्राथमिक विद्यालय रतौली में स्पेस लैब शुरू होते ही सेटेलाइट का अवलोकन करते बच्चे। स्रोत: सूचना विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। जिले के परिषदीय स्कूलों में बनाईं जा रहीं 40 स्पेस लैब में से सात लैब का सोमवार को शुभारंभ हो गया। इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर निलेश एम. देसाई ने इन लैब का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने स्कूली छात्र-छात्राओं से संवाद करके अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आने के लिए मार्गदर्शन किया।
जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के विशेष प्रयासों से जिले के 40 परिषदीय विद्यालयों में स्पेस लैब की स्थापना कराई जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) और व्योमिका फाउंडेशन के समन्वय से विलेज वैज्ञानिक कार्यक्रम के तहत अब तक सात स्पेस लैब बनकर तैयार हो गई हैं। सोमवार को इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (सैक) अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉ. निलेश एम. देसाई और इसरो के गगनयान मिशन के डायरेक्टर दीपक सिंह लैब का उद्घाटन करने महोबा पहुंचे। कबरई ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय रतौली से उन्होंने इन लैब का शुभारंभ किया। यहां से ही उप्रावि बरीपुरा, उप्रावि लिलवाही, उप्रावि ज्यौरइया, उप्रावि सिजरिया, उप्रावि मवई और उप्रावि छिकहरा में बनीं स्पेस लैब का उद्घाटन किया गया। डीएम ने कहा कि इस माह के अंत तक जिले के शेष 33 विद्यालयों में कार्य पूर्ण करके लैब समर्पित कर दी जाएंगी। इस तरह की लैब स्थापित करने वाला महोबा प्रदेश का पहला जिला बन गया है। कार्यक्रम में मंडलायुक्त अजीत कुमार, डीआईजी राजेश एस, सीडीओ बलराम कुमार, एडीएम कुंवर पंकज, डीपीआरओ सीके वर्मा, बीएसए राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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इंसेट
इसरो के कार्यों का वर्णन करके युवाओं का किया मार्गदर्शन
महोबा। स्पेस लैब का उद्घाटन करने के बाद सैक के डायरेक्टर डॉ. निलेश एम. देसाई और गगनयान के डायरेक्टर अंतरिक्ष वैज्ञानिक दीपक सिंह ने मोदी ग्राउंड में लगाई गई राष्ट्रीय आविष्कार अभियान की प्रदर्शनी का अनावरण किया। उन्होंने बच्चों के बनाए प्रोजेक्ट देखे। इसके बाद सूर्य महोत्सव के मंच पर पहुंचकर डॉ. देसाई ने इसरो के चंद्रयान, गगन यान, आदित्य मिशन, रडार तकनीक, क्वांटम तकनीक आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्पेस मिशन हमेशा रिस्क का कार्य है लेकिन मिशन असफल होने पर वे फेल की परिभाषा फर्स्ट अटेम्प्ट इन लर्निंग मानते हुए दोबारा काम में जुट जाते हैं। इसरो की स्थापना में वैज्ञानिक विक्रम साराभाई और सीबी रमन के योगदान के बारे में भी उन्होंने बताया। कहा कि युवा अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई करके इस क्षेत्र में आगे आएं और देश को विश्व पटल पर नए कीर्तिमान स्थापित करने में सहयोगी बनें।
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बाल संवाद
फोटो 16 एमएएचपी 25 परिचय-छात्र रुद्रांश पचौरी के सवालों का जवाब देते सैक के निदेशक निलेश एम. देसाई। संवाद
फोटो 16 एमएएचपी 26 परिचय-आयुषी तिवारी। संवाद
फोटो 16 एमएएचपी 27 परिचय-ध्रुव कुमार। संवाद
फोटो 16 एमएएचपी 28 परिचय-स्वास्तिका। संवाद
प्रश्न-1 : आयुषी तिवारी, जीआईसी श्रीनगर - अतंरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बालिकाओं के लिए क्या अवसर हैं?
जवाब : इसरो में काफी संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं। सभी के लिए इस क्षेत्र में समान अवसर हैं। इंजीनियरिंग आदि के बाद इंटर्नशिप करने के लिए इसरो जाना चाहिए।
प्रश्न-2 : ध्रुव कुमार, ज्ञानस्थली स्कूल महोबा - असफलता के समय जो प्रेशर होता है, उसे कैसे हेंडल करते हैं?
जवाब : सैक का माहौल बहुत अच्छा है। सबको एक-दूसरे से प्रश्न करने, जवाब देने की छूट होती है। इससे कारण प्रेशर कम रहता है।
प्रश्न-3 : रुद्रांश पचौरी, ज्ञानस्थली स्कूल, महोबा - विभिन्न ग्रहों को मिशन चलाकर एक्सप्लोर करने की क्या जरूरत है?
जवाब : इससे हम काफी चीजें जानते हैं। जैसे शुक्र ग्रह में अब कुछ नहीं बचा तो हम पता करते हैं कि पृथ्वी को ऐसा होने से कैसे बचा सकते हैं। अन्य ग्रहों पर जीवन, पर्यावरण आदि की मौजूदगी के बारे में भी पता चलता है।
प्रश्न-4 : स्वास्तिका, इंडसवैली स्कूल, महोबा - इसरो के सैटेलाइट लांचिंग के फायदे क्या हैं?
जवाब : सैटेलाइट और रडार तकनीक से हवामान, मौसम, सूखे, चक्रवात, तूफान आदि के खतरों की चेतावनी पहले ही पता चल जाती है। कम्यूनिकेशन आसान हो रहा है।