जिले में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा की मिसाल वर्षों से चली आ रही है। नवरात्र पर श्रीनगर की शाहजहां मूर्ति स्थापित कराकर आरती करती है। वहीं, कुलपहाड़ कस्बे का सोनी परिवार चार पीढ़ियों से ताजिया बनाने के साथ ताजिया जुलूस में शिरकत कर गंगा-जमुनी तहजीब कायम किए है।
कस्बे के मोहल्ला सोनीगंज निवासी रमेश सोनी बताते हैं कि उनके दादा कालूराम के संतान होते ही उसकी मौत हो जाती थी। तभी एक फकीर ने उन्हें ताजिए का पाया उठाने को कहा। उन्होंने इस पर अमल किया और उनका वंश आगे बढ़ गया। तभी से परिवार में ताजिया बनाने का सिलसिला शुरू हुआ।
अब तीसरी पीढ़ी तक ताजिया बनाने का काम जारी है। परिवार में कालूराम के बाद उनके पुत्र गुलजारी लाल और जुगल सोनी ने ताजिया बनाने की परंपरा जारी रखी। इसके बाद अब उसके पुत्र रमेश सोनी ताजिया बना रहे हैं। रमेश सोनी का कहना है कि वह स्वयं घर ही अपने हाथों से ताजिया बनाते हैं। उन्होंने
बताया कि कस्बे में पांच ताजिए मुस्लिम समुदाय के लोग बनाते हैं। एक ताजिया सोनी परिवार और एक ताजिया ठाकुर परिवार द्वारा बनाया जाता है। कस्बे में हिंदू मुस्लिम भाइयों द्वारा ताजिया निकालने की वर्षों पुरानी परंपरा जारी है।