महोबा। मानसून के दौरान रिकॉर्ड बारिश बांधों के लिए संजीवनी साबित हुई। जिले के छह बांध इस समय लबालब हैं। ऐसे में बांध की निगरानी बढ़ा दी गई है। सिंचाई विभाग की ओर से बांधों में स्थापित बाढ़ नियंत्रण चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। हर दो-दो घंटे के अंतराल में जलस्तर की नाप कराई जा रही है। बांधों में भरपूर पानी आ जाने से अब पेयजल व सिंचाई के लिए परेशानी नहीं होगी। लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।
बुंदेलखंड में इस सीजन में जनपद महोबा में सबसे अधिक औसत बारिश हुई। माह अगस्त बारिश के दृष्टिकोण से बेहतर रहा। वहीं सितंबर माह के प्रथम सप्ताह में भी भरपूर बारिश हुई। ऐसे में जिले के अर्जुन, कबरई, चंद्रावल, उर्मिल, लहचूरा आदि बांधों के जलस्तर में काफी बढ़ोतरी हुई है। यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित लहचूरा बांध पूरी तरह लबालब है। उर्मिल बांध में पानी अपने अधिकतम भंडारण क्षमता के करीब पहुंच गया। तहसील चरखारी क्षेत्र में स्थित अर्जुन बांध अधिकतम भंडारण क्षमता के साथ भरा हुआ है।
कबरई बांध में भी अधिकतम भंडारण क्षमता से अधिक पानी है। बांधों में इस समय चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। सिंचाई विभाग पूरी तरह सक्रिय है और बांधों की निगरानी बढ़ा दी गई है। बांधों के पूरी तरह लबालब हो जाने से अब किसानों को फसल सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। रबी सीजन में दो लाख से अधिक किसानों को नहरों के माध्यम से पानी मिलने से बेहतर पैदावार की उम्मीद रहेगी। पेयजल के लिए भी जनपद में पानी का संकट नहीं रहेगा।
बांधों का जलस्तर मीटर में
बांध-न्यूनतम-अधिकतम-वर्तमान
अर्जुन-167.64-176.17-175.66
चंद्रावल-146.91-152.40-152.06
कबरई-149.04-157.00-158.30
मझगवां-217.01-224.33-223.88
उर्मिल-228.30-237.43-236.90
लहचूरा- 179.83-182.30-182.30
(आंकड़े मीटर में)
महोबा में औसत से 71 फीसदी अधिक बारिश
एक जुलाई से अब तक बुंदेलखंड में सर्वाधिक औसत बारिश के मामले में महोबा अव्वल है। महोबा की औसत वर्षा 564.7 मिमी है जबकि अब तक 966.2 मिमी बारिश हो चुकी है। जनपद में इस मानसूनी सीजन में अब तक 71 प्रतिशत ज्यादा औसत बारिश हो चुकी है। वहीं चित्रकूट में 67 फीसदी, बांदा व हमीरपुर में 55-55 प्रतिशत, ललितपुर में 24 और जालौन जिले में 13 फीसदी ज्यादा औसत बारिश हो चुकी है। कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा का कहना है कि बारिश के हिसाब से मानसून बेहतर रहा।
डेढ़ लाख की आबादी को नहीं होगा पेयजल संकट
यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित उर्मिल बांध से महोबा शहर की डेढ़ लाख की आबादी को पेयजल मुहैया कराया जाता है। कस्बा श्रीनगर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। महोबा पेयजल पुनर्गठन योजना के तहत उर्मिल बांध से पाइपलाइन से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी जाता है। प्लांट में पानी के शोधित होने के बाद शहर में स्थित टंकियों में पानी भरा जाता है। इसके बाद शहर की डेढ़ लाख की आबादी को पानी दिया जाता है। उर्मिल बांध के पूरी क्षमता के साथ भर जाने से अब शहरवासियों को भरपूर पेयजल आपूर्ति मिलेगी। शहर में पेयजल संकट नहीं होगा। पिछले वर्षों में उर्मिल बांध का पानी अप्रैल-मई माह में तलहटी पर पहुंच जाता था। इससे पेयजल संकट गहरा जाता था।