महोबा। यातायात माह नवंबर मनाया जा रहा है। इसके बाद भी जिले में चिह्नित ब्लॉक स्पॉटों में अधिकांश स्थानों से संकेतक गायब हैं। ऐसे में वाहन चालक सड़कों की स्थिति नहीं समझ पाते और हादसे का शिकार हो जाते हैं। जिले में दस माह में अलग-अलग सड़क हादसों में 130 लोगों की जान चली गईं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे हैं। ऐसे में आगामी दिनोंं में कोहरा व धुंध होने पर वाहन चालकों को एक बार फिर दिक्कत होगी।
जिले में चिह्नित अधिकांश ब्लॉक स्पॉट के आसपास सड़कें भी बदहाल हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर पेड़ों पर रिफ्लेक्टर व संकेतक लगाए गए थे लेकिन वह नजर नहीं आते। जनपद में शाहपहाड़ी, मामना तिराहा, हमीरपुर चुंगी, किड़ारी फाटक, पीडब्ल्यूडी तिराहा, चांदो, बरा नाला, गिलिंदा मंदिर के पास श्रीनगर, बरबई मोड़, बांदा तिराहा, महोबा बाईपास पनवाड़ी, सूपा तिराहा, लाड़पुर, चिचारा, पहरा रोड, सुदामापुरी व खनिज बैरियर के पास ब्लैक स्पॉट हैं। इन स्थानों पर सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। 10 माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो अलग-अलग स्थानों पर 209 हादसे हुए। इसमें 130 लोगों की जान चली गई। जबकि 173 लोग घायल हुए हैं। इसके बाद भी ब्लैक स्पाॅट के आसपास वाहन चालकों को सचेत करने के लिए संकेतकों का अभाव है।
यातायात प्रभारी सुनील कुमार का कहना है कि ब्लैक स्पॉटों व आसपास पेड़ों में रेफलेक्टर टेप के साथ स्पीड के संकेतक लगाए गए हैं। ताकि, वाहन चालकों को किस स्थान पर कितनी स्पीड पर चलना है। इसकी जानकारी हो सके। यातायात नियमों को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
सीन-एक
पीडब्ल्यूडी तिराहा पर तीन साल पहले हादसे में हुई थी तीन की मौत
महोबा। शहर के गुजरे कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पीडब्ल्यूडी तिराहा ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित है। यह स्थान दुर्घटना बाहुल्य है। तीन साल पहले तेज रफ्तार डंपर ने ई-रिक्शा को रौंद दिया था। जिससे ई-रिक्शा में सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी। यहां आए दिन हादसे होते हैं। इसके बाद भी यहां संकेतक नहीं लगाए गए हैं। जिससे सड़क दुर्घटनाएं थम नहीं रही हैं। सड़क से सफेद पट्टी भी गायब है।
सीन-दो
महुआ मोड़ के पास भी संकेतक गायब
महोबा। जनपद से गुजरे झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे पर कस्बा पनवाड़ी के पहले स्थित महुआ मोड़ को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां पिछले चार सालों में हुए अलग-अलग सड़क हादसों में छह से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी महुआ मोड़ से संकेतक गायब हैं। यहां संकेतक लगाए जाने को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अंधा मोड़ होने से यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं।