बैठक करते मुस्लिम समुदाय के लोग
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महोबा में आयोजित परिवर्तन रैली में तलाक के मसले पर दिए गए बयान को लेकर हजरत अली कमेटी ने बैठक कर प्रधानमंत्री के बयान की निंदा करते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया। बैठक में कहा गया कि शरियत में तलाक देने का पति को अधिकार दिया गया
है इसे बदला नहीं जा सकता।सैय्यद ऐरज हाशमी ने कहा कि जो कुरान और हदीश को नहीं मानेगा वह मुसलमान हो ही नहीं सकता। तलाक की व्यवस्था बहुत ही मजबूरी में देने का हुक्म दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो इक्का दुक्का लोग तलाक का विरोध कर रहे हैं उन्हें मुसलमान नहीं कहा जा सकता।
हजरत अली कमेटी के संरक्षक जमील सिद्दीकी ने कहा कि शरियत में किसी भी तरह के संशोधन की गुंजाइश नहीं है। इस्लामी कानून पर कोई हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा।स्टूडेंट स्कूल के प्रबंधक समीम अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तलाक पर जो बयान दिया है वह शरियत के खिलाफ है। मुस्लिम
समुदाय के लोग शरियत के खिलाफ कोई काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि तलाक के बावत एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें महिलाओं और पुरुषों का हां और न में नजरिया लिया जाएगा। बैठक में हजरत अली कमेटी के अध्यक्ष जलील पठान, मुहम्मद रहूफ, याशीन मास्टर, मुहम्मद रजब, समी जख्मी, दुलारे भाई, कादिर मंसूरी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।