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बेशर्म खाकी : 30 मिनट तक घटनास्थल पर तड़पता रहा भाजयुमो नेता, पुलिस करती रही लूटपाट

Thu, 19 Sep 2024 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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महोबा। चरखारी-महोबा मार्ग पर सूपा मोड़ के पास दुर्घटना में एक युवक के घायल पड़े होने की सूचना पर पहुंची पीआरवी पुलिस ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दीं।
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घटनास्थल पर 30 मिनट तक भाजयुमो नेता तड़पता रहा और पुलिस लूटपाट करती रही। यदि, पुलिसकर्मी मानवता दिखाते और घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाते तो उसकी जान बच सकती थी।
हालांकि, पुलिस ने 36 घंटे के अंदर ही घटना का खुलासा करते हुए पीआरवी कर्मी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। आरोपियों के कब्जे से भाजपा नेता की चार अंगूठी, चेन और दो मोबाइल बरामद हुए।
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कस्बा चरखारी के मोहल्ला घुसयाना निवासी भाजयुमो नगर अध्यक्ष व व्यापार मंडल में युवा महामंत्री सचिन पाठक 16 सितंबर की रात करीब 10 बजे सूपा-चरखारी मोड़ के पास सड़क किनारे घायल अवस्था में मिले थे। सूचना पर दस-पंद्रह मिनट बाद पीआरवी कर्मी मौके पर पहुंचे।
पीआरवी वाहन में दो लोग सवार थे। तब एक सिपाही नीलकमल ने फोन कर अपने दो साथियों को बुलाया। मौके पर पहुंचे साथी घायल को उठाकर गाड़ी में लिटाने के बजाय व्यापारी के दोनों हाथों से चार अंगूठी, चेन व पैंट से दो मोबाइल निकाल लिए। इसके बाद दोनों साथी फरार हो गए।
पुलिस करीब 11.10 बजे अस्पताल पहुंची। 15 मिनट तक इलाज चलने के बाद 11.25 बजे भाजपा नेता ने दम तोड़ दिया। इस मामले में मृतक के भाई ने कोतवाली चरखारी में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या व लूट का मुकदमा दर्ज कराया था
घटना के खुलासे के लिए गठित चार टीमों ने जांच में पाया कि पीआरवी वाहन में तैनात सिपाही नीलकमल ने अपने दो अन्य साथियों के साथ घायल के पास से मोबाइल, अंगूठी और चेन निकाली थी।
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि घटना में शामिल सिपाही नीलकमल निवासी मुक्तीगंज जनपद जौनपुर, उमेशचंद्र गुप्ता निवासी मगरियापुरा और जवाहर पाटकर निवासी जुगयानापुरा, महोबा को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजा गया।
खुलासा होने के बाद स्पष्ट हो गया कि भाजपा नेता की हत्या नहीं बल्कि दुर्घटना में मौत हुई थी और सामान पीआरवी कर्मी ने साथियों के साथ निकाल लिया था।
पुलिस दिखाती मानवता तो बच सकती थी जान
महोबा। भाजयुमो नगर अध्यक्ष चरखारी सचिन पाठक के दुर्घटना में घायल होने के बाद वहां से गुजरे लोगों ने जब एक युवक को सड़क किनारे अचेत अवस्था में पड़ा देखा तो यूपी 112 पुलिस को सूचना दी। एक पुलिसकर्मी घायल को अस्पताल पहुंचाने के बजाय पहले माल कब्जे में लेने में जुटा रहा। बाद में उसे अस्पताल लाया गया। जहां इलाज दौरान मौत हो गई। लोगों का कहना है कि यदि सिपाही मानवता दिखाते हुए घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाता तो उसकी जान बच सकती थी।
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