महोबा। फसल बीमा योजना के तहत कुलपहाड़ तहसील के जैतपुर गांव की तरह चरखारी तहसील क्षेत्र के ग्राम कुआं में भी फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां के किसानों की जमीनों पर कराई गई बीमा पॉलिसियों के क्लेम की धनराशि गुजरात, दिल्ली व मध्यप्रदेश में खुले बैंक खातों में भेजी गई।
यहां के 30 किसानों की जमीनों पर ली गईं बीमा पॉलिसियों के धारकों के नाम मूल किसानों के नाम से भिन्न होने से इन्हें संदिग्ध बीमा पॉलिसी माना जा रहा है। किसान नेता गुलाब सिंह राजपूत ने फसल बीमा घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिले में खरीफ-2024 सीजन के बाद अब रबी-2024 सीजन में भी तरह-तरह के घोटाले सामने आ रहे हैं। जय जवान जय किसान एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत ने बताया कि एक दिन पहले जिस तरह से कुलपहाड़ तहसील क्षेत्र के जैतपुर गांव में रबी-2024 सीजन में 103 किसानों की 1,145 बीघा जमीन पर फर्जी तरीके से 216 पॉलिसियां लेने और 77 लाख रुपये का क्लेम हड़पे जाने का मामला सामने आया था।
ठीक उसी तरह से चरखारी तहसील क्षेत्र के ग्राम कुआं में भी गड़बड़ी की गई है। यहां पर भी गांव के एक-एक किसान की जमीन पर चार से पांच अलग-अलग नामों से फसल बीमा कराया गया और नुकसान दिखाकर बीमा क्लेम भी निकाल लिया।
इस गांव के किसान प्रेमदेवी, सर्वेश कुमार, कंधीलाल, मक्खन, रामाधार, अनिल कुमार, विपिन कुमार, गिरजारानी, रामचरन, उमाशंकर आदि 30 किसानों की 732 बीघा जमीन पर 56 बीमा पॉलिसियां ली गईं लेकिन इन पॉलिसी में मूल किसान का नाम नहीं हैं। बीमा धारकों का नाम राजस्व खतौनी के रिकाॅर्ड से अलग है। जिनके नाम बीमा पॉलिसी में अंकित है, उनके नाम वास्तविक किसान के नाम से मेल नहीं खा रहे है। मजेदार बात तो यह कि सभी बीमा धारकों ने केवल चना की फसल की बोआई की।
नुकसान होने पर व्यक्तिगत दावा के आधार पर 21 लाख रुपये और पोस्ट हार्वेस्ट श्रेणी में तीन लाख रुपए क्लेम भी लिया। इसमें से काफी क्लेम गुजरात के जूनागढ़ सहित मध्यप्रदेश व दिल्ली में संचालित बैंक खातों में भेजा गया है जबकि मूल किसानों में से अधिकांश तो खुद के साथ हुई इस तरह की ठगी के अनभिज्ञ हैं। गुलाब सिंह राजपूत ने इस मामले की एसआईटी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।