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Mahoba News: पुरातत्व संरक्षित धरोहरों की सूची से बाहर हुआ सेनापति महल

Tue, 22 Jul 2025 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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महोबा। पुरातत्व विभाग ने ऐतिहासिक इमारतों की संरक्षित सूची से कुलपहाड़ के सेनापति महल को बाहर कर दिया है। इसी के साथ ही सेनापति महल में बदलाव पर लगी रोक भी खत्म हो गई। अब इनके स्वरूप में मनचाहा बदलाव किया जा सकेगा। पुरातत्व विभाग के अफसरों का तर्क है कि पर्यटन बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल पर देने के लिए संरक्षित सूची से बाहर किया गया।
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बुंदेलखंड में मध्य काल में बुंदेला, चंदेल आदि राजघरानों ने ऐतिहासिक किले, गढ़ी, सराय समेत कई इमारतें बनवाईं। अधिकांश इमारतों का आज भी वजूद कायम है। इनके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए दशकों पहले इनके सरंक्षण का जिम्मा पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध सेनापति महल का जिम्मा अब पुरातत्व विभाग से वापस लिया है। सेनापति महल को पुरातत्व संरक्षित धरोहरों की सूची से बाहर कर इसे पर्यटन विभाग को सौंपा गया है। पर्यटन विभाग की ओर से सेनापति महल में विकास कार्य कराए जाना प्रस्तावित हैं। इस ऐतिहासिक धरोहर को पीपीपी मॉडल पर हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे यहां देसी-विदेशी पर्यटक आएंगे। इससे जिले के पर्यटन विकास को पंख लगेंगे। पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने बताया कि सेनापति महल में पर्यटन विकास कार्य कराए जाने का खाका तैयार किया गया है। पुरातत्व संरक्षित सूची से सेनापति महल के बाहर आने से अब यहां विकास कार्य कराने में आसानी होगी।
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कुलपहाड़ के सेनापति महल का इतिहास
महोबा। कस्बा कुलपहाड़ में 18वीं शताब्दी की शुरुआत में जैतपुर के राजा जगतराज ने अपने बेटे सेनापति के लिए एक सुंदर महल बनवाया था। यह महल तीन मंजिला है और कुलपहाड़-नौगांव मार्ग पर स्थित है। बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसका जीर्णोद्धार किया था और वर्ष 1996 में इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया था।
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