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विद्यालय बंद कर किया कार्य बहिष्कार

Mon, 14 Sep 2015 10:38 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा
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महोबा। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर टीचर बनाए गए शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किए जाने से नाराज जिले के सैकड़ों शिक्षामित्रों ने सोमवार को बीएसए कार्यालय परिसर में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और आरटीआई एक्ट 2009 के नियमों में शिथिलता प्रदान कर बहाल किए जाने की मांग की।  मालूम हो कि कुछ माह पहले शासन के आदेश पर जिले के 900 से ज्यादा शिक्षामित्रों का समायोजन कर सहायक  टीचर बना दिया गया था। इसके विरोध में कुछ टीईटी उत्तीर्ण शिक्षित बेरोजगारों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। 12 सितंबर को उच्च न्यायालय इलाहाबाद की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शिक्षामित्रों की नियुक्ति अवैध घोषित कर रद्द किए जाने के निर्देश दिए थे, जिससे जिलों के सैकड़ों शिक्षामित्र बेरोजगार हो गए है।

 कोर्ट के आदेश पर गुस्साएं शिक्षामित्रों ने सोमवार को बीएसए कार्यालय पहुंचकर हाथ पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, साथ ही विद्यालयों का बहिष्कार कर दिया, जिससे तमाम विद्यालयों में शिक्षण कार्य ठप रहा। धरना देकर शिक्षामित्रों ने मानव विकास संसाधन मंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि 16 सालों से मामूली से मानदेय पर शिक्षामित्र की नौकरी कर रहे टीचरों की अब उम्र निकल चुकी है। तमाम शिक्षामित्रों ने टीचर बनने की आश में दूसरी नौकरी नहीं की। नियुक्ति रद्द होने से उनकी रोजी रोटी छिन जाने से उनका परिवार भुखमरी की कगार में पहुंच गया है।
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टीचर बनने का सपने पर फिरा पानी
डेढ़ दशक तक टीचर बनने का सपना संजोए शिक्षामित्रों के अरमानों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद पानी फिर गया है। शिक्षामित्र से टीचर बनने के बाद अब उन्हें बैक होना रास नहीं आ रहा है। शिक्षामित्र इस आदेश से खासे खफा हैं। अदालत के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के चेहरे मुरझा गए हैं।

शिक्षामित्रों के प्रति बीएसए ने जताई सहानुभूति
शिक्षामित्रों के दुख में शामिल होकर बीएसए ने भी उनके प्रति हमदर्दी जताई है। इतना ही नहीं कार्यालय से उठकर शिक्षामित्रों के धरना स्थल पर पहुंचकर उनका हर पल साथ देने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने शिक्षामित्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ देने की बात कही।
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शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द होने से बेहद अफसोस है, कोई भी शिक्षामित्र किसी भी तरह का गलत कदम न उठाए। सरकार उनके साथ है। सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के साथ शिक्षामित्रों का मानदेय भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा वह हताश न हो।
              रामेश्वर प्रसाद पाल
    जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, महोबा
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