बालविदुषी डॉ. रंजना ने कहा कि इस देश में संत नहीं होते हो भारतीय संस्कृति का पतन हो चुका होता और हमारा देश पाश्चात्य संस्कृति के अधीन हो चुका होता। संत ही देश की अमूल्य धरोहर हैं, जो देश को एकरूपता के सूत्र में पिरोने का काम करते हैं।
अखंड परमधाम आश्रम उत्तरकाशी से आईं बाल विदुषी रंजना आजाद नगर स्थित सपा नेता शीतल यादव के आवास पर आयोजित संत समागम सत्संग में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि यदि इस देश में साधु संत नहीं होते तो हमारा देश कभी प्रगति का पथ नहीं पकड़ पाता।
साधु संत संन्यासी किसी भी वर्ग धर्म का हो वह अपने भक्तों श्रद्धालुओं और समाज को सदैव आगे बढ़ते देखना चाहता है और उनका प्रेरणा स्रोत बन जाता है। हमारा धर्म किसी दूसरे धर्म, संस्कृति पर प्र्रहार करने, आलोचना करने की अनुमति नहीं देता।
संत सदा ही सर्व धर्म भाव के साथ समाज को नया आयाम देने का सदैव प्रयास करते हैं। सप्त सरोवर आश्रम हरिद्वार से आए संत स्वामी विश्वात्मानंद गिरि ने कहा कि जब जब समाज के ऊपर विपदा आई है साधु संतों ने अपने तपोबल से उसकी रक्षा की है।
आज भी बहुत से ज्ञानी संत महात्मा है जो देश में अखंडता एकता भाईचारा का संदेश लेकर पूरे देश को एकसूत्र में पिरोने का काम करते हैं।
हमें बढ़ते प्रतिस्पर्धा के दौर में साधु संतों से कभी प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए। हमारा काम धर्म के सद्मार्ग पर चलकर समाज को विकास का रास्ता दिखाना होता है। सत्संग के दौरान पूर्व सभासद ठाकुरदीन, मुकेश यादव, दिलीप तिवारी, गोपालदत्त पांडेय, कंधी सेठ, कल्याण सिंह, देवेंद्र गुप्ता, सूरज गुप्ता मौजूद रहे।