हजरत निजामुद्दीन औलिया का दो दिवसीय सालाना उर्स धूमधाम से मनाया गया। दूर दराज से आए कव्वालों ने सूफियाना कव्वालियां प्रस्तुत कर समां बांध दिया। पूरी रात लोगाें ने कव्वालियों का लुत्फ उठाया।
निजामुद्दीन औलिया के सालाना उर्स के पहले दिन शनिवार की रात चादर जुलूस निकाला गया, जो परंपरागत मार्गों से होता हुआ रात दस बजे मजार-ए-अकदस पर पहुंचा। चादर चढ़ाने के बाद अकीदतमंदों ने मन्नतें मानी और फातिहा पढ़ी। इसके बाद कव्वालियों का सिलसिला शुरू हुआ, जो तड़के सुबह चार बजे तक चलता रहा।
मौदहा से आए कव्वाल एहसान ने कव्वाली की शुरुआत नातिया कलाम से की। इसके बाद कव्वाली शुरू हुई। सूफियाना कव्वालियां सुनने के लिए महोबा के अलावा आसपास के जिलों से भी लोग आए।
रविवार को तड़के सुबह छह बजे मजार-ए-अकदस पर कुरानख्वानी हुई। इसके बाद दो बजे फातिहा हुई। फातिहा के बाद मजार-ए-अकदस पर सभी को लंगर छकाया गया, जहां लोगाें की भारी भीड़ जुटी। उर्स के मौके पर मुस्लिमों के अलावा हिंदू भाइयों ने भी शिरकत कर सभी ने लंगर खाया।