महोबा। आईजीआरएस पोर्टल पर जनता दर्शन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतना विभिन्न विभागों के अधिकारियों को महंगा पड़ गया। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले 24 विभागों के अधिकारियों का वेतन रोक दिया है। इससे अधिकारियों में खलबली मची है।
शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शिकायतकर्ता की संतुष्टि के आधार पर किया जाना ही शासन की प्राथमिकता है। डीएम ने जन शिकायतों से संबंधित आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल की सभी जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की। डीएम ने पोर्टल पर जनपद की पूर्व स्थिति व वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए रैंकिंग के निर्धारित 11 मूल्यांकन बिंदुओं पर विभाग और अधिकारियों की ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर से जानकारी हासिल की। इस दौरान डीएम ने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु शिकायतकर्ता से प्राप्त असंतुष्ट फीडबैक व शिकायतकर्ता से संपर्क न किए जाने वाले निस्तारण से संबंधित अधिकारियों अधिशासी अभियंता जल निगम (ग्रामीण/नगरीय), एलडीएम, उपनिदेशक कृषि, अपर मुख्य अधिकारी, खान निरीक्षक, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, उपायुक्त उद्योग, आबकारी अधिकारी, श्रम अधिकारी, एआरएम रोडवेज, डीआईओएस, जिला समाज कल्याण अधिकारी, अधिशासी अभियंता बिजली (नगरीय/ग्रामीण), परियोजना अधिकारी डूडा, अधिशासी अभियंता जल निगम, सीएमएस जिला अस्पताल (पुरुष/महिला), अधिशासी अभियंता सिंचाई, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, सीएमओ, सीवीओ, सहायक अभियंता लघु सिंचाई, तहसीलदार, सब रजिस्ट्रार, बीडीओ, एमओआईसी, एडीओ समेत 24 से ज्यादा जनपद स्तरीय अधिकारियों के वेतन रोके जाने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि प्रतिदिन सुबह कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई करें। साथ ही आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता से संपर्क करें और संतुष्टि के आधार पर नियमानुसार निस्तारण करें। स्थलीय निरीक्षण कर गवाहों के हस्ताक्षर, फोटोग्राफ समेत आख्या लगाई जाए। ताकि फीडबैक में सुधार हो सके।