राठ रोड पर रविवार को सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें बांदा के संत दिलीप सिंह ने कहा कि समस्त जगत परमात्मा का स्वरूप है। उन्होंने कहा कि अज्ञानता में हमने मायारूपी साधन को साध्य मान लिया है। कहा कि सद्गुरु प्रभु का ज्ञान देकर अज्ञानता को दूर करता है।
कहा कि जब इंसान सद्गुरु का ध्यान करता है, तब खुद व खुद सुमिरन होने लगता है और दूसरी ओर ध्यान नहीं जाता। कहा कि जो गुरु के वचन को मानता है परमात्मा को देखता है वह इंसान कभी किसी का बुरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि सारा संसार ही अपना परिवार है, हमे पवित्र भावना को आगे बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि सद्गुुरु ने सदा यही सिखाया कि परमात्मा ही इस दुनियां का रचियता है और हमेशा इसे देखकर ही भक्ति होती है। कहा कि जब भक्त को कण कण में प्रभु के दर्शन हो जाते है, तब इस बात का अहसास होता है कि प्रभु परमात्मा ही इस सृष्टि का कर्ता धर्ता है। सत्संग का संचालन गोविंददास ने किया।
संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को मोहल्ला कठकुलवापुरा के कबीर आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ कबीर वंदना के साथ हुआ। इसके बाद कंछेदीलाल पुरवार, रामअवतार, राजकुमारी अनुरागी, रामप्रकाश आदि ने कबीर के भजन सुनाए।
डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि सात दीप, नौ खंड, तीन लोक व इक्कीस ब्राम्हृणाें में गुरु सबसे बड़ा है। इसलिए हर क्षण गुरु की शरण में रहकर सद्कार्य करना चाहिए। सत्संग में किशोरदादा पुरवार, छविलाल, कमलापत, श्यामानंद द्विवेदी, बलबीर वैश्य आदि भक्त मौजूद रहे।