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जर्जर इमारतों में चल रहे स्कूल और कार्यालय

Thu, 02 Feb 2017 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
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कुलपहाड़ में स्थित जर्जर इमारत। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जर्जर इमारतों में आज भी कार्यालय, स्कूल और प्रतिष्ठान चल रहे है। कानपुर में इमारत ढहने के बाद कई लोगों की मौत हो गई।  इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता है। जिले में कई इमारतें 100-100 साल पुरानी खड़ी हैं।


शहर के मोहल्ला छजमनुपरा में ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई एक इमारत में मुंशी प्रेमचंद किराये पर  रहा करते थे। एक माह पहले 100 साल पुरानी यह इमारत ढह जाने से एक वृद्ध की दबकर मौत हो गई थी। इसके बाद भी प्रशासन ने इन जर्जर इमारतों की सुध नहीं ली। न ही जर्जर इमारतों में चल रहे विद्यालयों को बंद कराया गया। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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कस्बा कुलपहाड़ में राजकीय बालिका इंटर कालेज एक जर्जर इमारत में चल रहा है। इसमें सैकड़ों छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती है। 100 साल पुरानी इस जर्जर इमारत को आजतक खाली नहीं कराया गया। बारिश और तेज हवाओं के बीच भी छात्राएं इसी जर्जर इमारत में शिक्षा ग्रहण करती है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसी तरह शहर की लाकप की इमारत 100 साल पुरानी इमारत है।


कुलपहाड़ निवासी हरीकृष्ण और रामसेवक का कहना है कि उनकी बच्चियां इसी जर्जर इमारत में शिक्षा ग्रहण कर रहीं है। दूसरा कोई राजकीय इंटर कालेज न होने से मजबूरन इसी विद्यालय में भेजना पड़ता है। अभिभावक मुकेश और हरीशरण का कहना है कि बच्चियों का मजबूरी में प्रवेश करा दिया थ्रा,
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लेकिन अब घर आने तक बच्चियों में जान लगी रहती है। कई बार दूसरी इमारत में विद्यालय स्थानांतरण कराए जाने के लिए प्रधानाचार्य से कहा गया, लेकिन कोई दूसरी बिल्डिंग की व्यवस्था नहीं की गई। जीजीआईसी कुलपहाड़ की प्रधानाचार्या संतोष सिंह का कहना है कि कई बार उच्चधिकारियों को विद्यालय के बाबत अवगत कराया जा चुका है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया।
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