कस्बे का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जुगाड़ के
चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है। दो माह से तैनात डॉक्टर के अन्य जिले में
स्थानांतरण होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजाें को
फार्मासिस्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। कभी-कभी चिकित्सक न होने से
प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है।
नगर पंचायत खरेला में
संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कस्बे की 25 हजार की आबादी के साथ 24
गांव मजरों की 50 हजार आबादी आश्रित है।
जिले भर के प्राथमिक
स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से अधिक वार्षिक ओपीडी
वाला केंद्र स्थायी चिकित्सक के लिए मोहताज है। दो माह पहले तैनात
चिकित्सक का गैर जिले में तबादला हो गया। एक अन्य तैनात डॉक्टर को भी जिले
के अन्य केंद्र में तैनात कर दिया गया है लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
खरेला के लिए महकमा एक स्थायी चिकित्सक तैनात नहीं कर पाया।
ग्राम
दुलारा में तैनात डॉक्टर को तीन दिन खरेला और तीन दिन दुलारा प्राथमिक
स्वास्थ्य केंद्र में संबद्ध कर दिया गया है। ये चिकित्सक भी कभी कभार ही आ
रहे हैं।
रोजाना सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी वाले केंद्र में
मरीजों का फार्मासिस्ट उपचार कर रहे हैं। आला अफसरों ने गुरुवार के लिए
गौरहारी के डॉक्टर व शुक्रवार को चरखारी के एक चिकित्सक और शनिवार को भी
गौरहारी के चिकित्सक को अस्थाई व्यवस्था में लगाया है।
स्वास्थ्य
महकमे की इस व्यवस्था में लोगाें में खासा आक्रोश है। चरखारी सामुदायिक
स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार राजपूत ने बताया कि जिला स्तर
पर व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसी वजह से अस्थाई व्यवस्था से काम चलाया
जा रहा है। उधर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वार्ष्णेय का फोन बंद होने
के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका।