महोबा। आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाने वाली कहकशा जलाल की मुहिम रंग ला रही है। वर्ष 2016 में तीन छात्राओं के समूह से शुरू किए गए मुफ्त सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण से अब तक 300 महिलाओं को हुनरमंद बना चुकी हैं। 30 युवतियां व महिलाएं मुफ्त में प्रशिक्षण लेने के बाद स्वयं का कारोबार कर रही हैं।
लवकुशनगर तिराहा निवासी कहकशा जलाल किराये के मकान में रहती हैं। सिलाई-कढ़ाई के साथ ब्यूटी पार्लर, मेंहदी व लिफाफे का हुनर सीख कहकशा ने वर्ष 2016 में मुफ्त प्रशिक्षण देना शुरू किया। आर्थिक रूप से कमजोर व फीस अदा करने में अक्षम महिलाओं व युवतियों को सिलाई-कढ़ाई सिखाई। वर्तमान में 20 महिलाएं सिलाई-कढ़ाई व ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण ले रही हैं। कहकशा बताती हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर व बेसहारा महिलाएं प्रशिक्षण लेकर खुद का कारोबार शुरू करती हैं तो उन्हें खुशी मिलती है। वह प्रतिदिन तीन से चार घंटे प्रशिक्षण देतीं हैं। शेष समय में वह स्वयं कपड़ों की सिलाई का काम करती हैं। इससे खर्च निकल आता है।
वर्ष 2015 में कहकशा जलाल एक स्वयंसेवी संस्था में काम करती थीं। इस दौरान उनकी मुलाकात ब्लॉक जैतपुर के ठठेवरा निवासी विनीता से हुई। आर्थिक रूप से परेशान विनीता आत्महत्या करने खेतों की ओर जा रही थी। महिला का दर्द सुनकर कहकशा ने ढांढस बंधाया और सिलाई का प्रशिक्षण देकर स्वयं का कारोबार करने को प्रेरित किया। तब से कहकशा ने स्वयंसेवी संस्था से काम छोड़कर स्वयं समाजसेवा व महिलाओं को हुनरमंद बनाने का बीड़ा उठाया।
मुफ्त सिलाई-कढ़ाई व प्रशिक्षण लेने के बाद कई महिलाओं ने घर पर ही खुद का कारोबार शुरू कर दिया है। वर्तमान में किरन, वर्षा, विनीता, अंजू, रजनी, शिल्पी, पाना, सपना, अफसाना, कशिश, काजल, रानी समेत 30 महिलाएं सिलाई कढ़ाई व ब्यूटी पॉर्लर सेंटर चला रहीं हैं। जिससे उन्हें प्रतिदिन 300 से 500 रुपये की आमदनी हो रही है।