ग्राम बसौठ के एक किसान ने दृढ़ इच्छाशक्ति व सेवा भाव का संकल्प लेकर जो किया वह न सिर्फ समाजसेवियों बल्कि अधिकारियों के लिए भी नजीर बन गया। गांव में पानी की किल्लत देख इस किसान ने अपने निजी खर्च पर पांच एकड़ के तालाब को जलमग्न कर दिया। किसान के इस कार्य से गांव से जलसंकट की समस्या भी काफी हद तक दूर हो गई है।
जिले में दैवीय आपदा के चलते हर कोई पानी के लिए परेशान है। तालाब व पोखर सूख जाने से मवेशियों के लिए पानी की विकराल समस्या है। ग्राम बसौठ में किसान स्वामीदीन यादव ने ‘जहां चाह है, वहां राह है’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए पानी की समस्या दूर कर दी।
शासन, प्रशासन गांव स्तर पर तालाबों पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी पानी नहीं भर पाया। बारिश न होने से जिले के करीब दो हजार तालाब सूख गए हैं और ज्यादातर तालाब खेल के मैदान में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीणों से लेकर उनके मवेशियों तक के सामने पानी की समस्या है। ब्लाक चरखारी के ग्राम बसौठ निवासी किसान स्वामीदीन यादव ने निजी ट्यूबवेल से स्वयं के खर्च पर पांच एकड़ का तालाब पानी से एक सप्ताह में भर दिया है।
सूखे पड़े तालाब में पानी भर जाने से ग्रामीणों की पानी की समस्या काफी हद तक दूर हुई है और मवेशियों को भी पानी मिल रहा है। किसान की जिंदादिली की चारों ओर सराहना की जा रही है। एक साधारण किसान के सेवाभाव के संकल्प को देखकर आसपास के समाजसेवी के लिए यह अनूठा कार्य आदर्श बनकर उभरा है।