जिले में बारिश न होने से खरीफ की फसलों में संकट के बादल छाने लगे है। मौसम के मिजाज से हजारों हेक्टेयर दलहन और तिलहल की फसल मुरझाने लगी है। कई वर्षों से दैवीय आपदा और तबाही का दंश झेल रहे किसानों के चेहरों में एक बार फिर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं।
बुंदेलखंड का पिछड़ा जिला महोबा में बारिश न होने से खरीफ की फसलें मुरझाती नजर आ रही हैं। पिछले सात वर्षों से दैवीय आपदा की मार से बर्बाद किसानों को इस वर्ष फसल की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी। एक माह पहले हुई बारिश के बाद किसानों ने खरीफ फसल की उत्साह के साथ बुवाई की थी। तिल, उर्द की मंहगी फसलों में खाद बीज जुटाकर बुवाई कर किसानों ने दिन रात जगकर अन्ना पशुओं से रखवाली की। एक माह से बारिश न होने व गर्मी और उमस से लहलहाती फसलें मुरझाने से किसानों की उंमीद में पानी फिरने लगा है। एेंचाना के प्रगतिशील कृषक राहुल तिवारी और बसौठ के किसान पूर्व प्रधान स्कंद तिवारी पहरेथा के लखनलाल द्विवेदी, भजन लाला कुशवाहा पुन्निया आदि कृषकों ने बताया कि तिल, उर्द और अरहर की फसल पूरी तरह मुरझा गई है। जल्द बारिश न हुई तो खरीफ की फसलें पानी के अभाव में सूखकर बर्बाद हो जाएगी। खरेला के कृषक रोशन सिंह, राजेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह और राजेंद्र साहू ने बताया कि कहा कि बारिश न होने से फसल सूख रहीं हैं, कुओं और तालाबों में भी पानी नहीं रह गया है। जिससे मवेशी भी प्यास से परेशान है। खरीफ की फसल बर्बाद हुई तो रबी की फसल पर भी ग्रहण लग जाएगा। जिला उप कृषि निदेशक आरपी चौधरी ने भी बारिश न होने से खरीफ की फसलें बर्बाद होने की बात स्वीकारी है। उन्होंने बताया कि जिले में 46120 हेक्टेयर में बोई तिल और 51875 हेक्टेयर उर्द के साथ-साथ 9350 हेक्टेयर की मूंग, 8250 हेक्टेयर अरहर, 11720 हेक्टेयर में बोई मूंगफली की फसल सूखने लगी है। अगर एक सप्ताह में बारिश न हुई तो फसलों की बर्बादी तय है।