यंती पर महान क्रांतिकारी पं. परमानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते बुंदेले। स्रोत: बुंदेली समाज
- फोटो : यंती पर महान क्रांतिकारी पं. परमानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते बुंदेले। स्रोत: बुंदेली समाज
महोबा। बुंदेलखंड के महान क्रांतिकारी पं. परमानंद की जयंती शुक्रवार को मनाई गई। परमानंद चौक पहुंचकर बुंदेलों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके अविस्मरणीय योगदान को याद किया। कायस्थ परिवार में जन्मे क्रांतिकारी परमानंद की विद्वता से प्रभावित होकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उनको पंडित की उपाधि दी थी।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि हमीरपुर जिले की राठ तहसील के सिकरौंधा गांव में 1889 में जन्मे पंडित परमानंद ने रानी लक्ष्मीबाई के बाद स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में बुंदेलखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। कायस्थ समाज के अध्यक्ष अरविंद खरे व सेवानिवृत्त शिक्षक शिव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पं. परमानंद की कुर्बानियों से अभिभूत होकर पं. जवाहर लाल नेहरू ने आजादी के बाद बनी पहली सरकार में शामिल होने के लिए उनको न्यौता दिया था लेकिन उन्होंने मंत्री बनने से यह कहकर इन्कार कर दिया था कि पद के लिए उन्होंने आजादी की जंग नहीं लड़ी। 13 अप्रैल,1982 में दुनिया छोड़ने से पहले उनका ज्यादातर समय गुमनामी में झांसी क्षेत्र में बीता। इस मौके पर दिलीप जैन, डाॅ. अजय बरसैंया, मनीष जैदका, गया प्रसाद, संतोष सक्सेना, विष्णु खरे समेत तमाम लोग मौजूद रहे।