महोबा। दो दिन पहले दरोगा की मारपीट कर वर्दी फाड़े जाने के मामले में कोतवाल और दो एसआई पर अवमानना नोटिस जारी किया गया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए। आरोपियों के साथ मारपीट करने और इसकी सूचना परिजनों को न दिए जाने से सोमवार को रिमांड पर अदालत गए मुल्जिमों को अदालत ने पुलिस कस्टडी से मुक्त करा दिया। साथ ही कोतवाली प्रभारी चरखारी, एसआई व चौकी प्रभारी सहित तीन लोगों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर दिया।
ग्राम सालट निवासी घासीराम कुशवाहा के खिलाफ दो दिन पहले जांच करने गए सूपा पुलिस चौकी इंचार्ज द्वारा ग्रामीण ने अभद्रता करने पर घासीराम और उसके भाई ने चौकी प्रभारी के साथ अभद्रता कर वर्दी फाड़ दी थी। चौकी इंचार्ज की सूचना पर ग्राम सालट पहुंचे कोतवाली चरखारी प्रभारी धर्मराज यादव, दिनेश शुक्ला, एसआई राधेबाबू ने पुलिस टीम के साथ घासीराम और उसके भाई मनप्यारे को गिरफ्तार कर जमकर मारपीट की, इसके बाद जेल भेज दिया। पुलिस ने गिरफ्तारी की सूचना पीड़ित के परिजनों को नहीं दी, साथ मानवाधिकार का उल्लंघन किया।
सोमवार को रिमांड के लिए पुलिस ने सिविल जज जूनियर डिविजन कुलपहाड़ (न्यायिक मजिस्ट्रेट) की अदालत में दोनों आरोपियों को लाया गया, जहां पर आरोपियों ने मारपीट की बात अदालत को बताई। सिविल जज जूनियर डिविजन अंकित गोयल ने गिरफ्तार किए गए दोनों भाइयों की मारपीट किए जाने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया कि किसी भी आरोपी की पिटाई न किए जाने और गिरफ्तारी करने पर पीड़ित के परिजनों को सूचना दी जानी चाहिए, लेकिन पुलिस ने अदालत के आदेश पर अमल न करके अवमानना की है। जिस पर सिविल जज जूनियर डिविजन ने कोतवाली प्रभारी चरखारी, सूपा चौकी इंचार्ज और एसआई राधेबाबू के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर 15 सितंबर को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। इससे चरखारी पुलिस में हड़कंप मच गया है।