महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर शहर के आल्हा चौक में बीते 610 दिन से अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने गुरुवार को अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली हिंसा में मारे गए सभी नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। अनशनकारियों ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उनको याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
तारा पाटकर ने कहा कि पिछले कुछ समय से दिल्ली में जो हो रहा है, उससे हम लोग बहुत दुखी हैं। देश की छवि को बिगाड़ने के लिए जिस तरह से हिंसा का सहारा लिया गया और तीन दर्जन लोग मारे गए, हम उसकी भर्त्सना करते हैं। उन्होंने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर सभी मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। महामंत्री डॉ. अजय बरसैया ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का बुंदेलखंड से गहरा नाता था। उन्होंने झांसी को अपना गढ़ बनाया और वहां से 15 किलोमीटर दूर ओरछा के जंगलों में अपने साथियों के साथ निशानेबाजी सीखी। वे यहां क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देते थे। प्रशांत बुंदेलखंडी ने कहा कि 25 वर्ष की अल्प आयु में 27 फरवरी 1931 में चंद्रशेखर आजाद ने प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। कार्यक्रम में माधव खरे, दीपेंद्र सिंह परिहार, जसवंत सिंह सेंगर, देवेंद्र तिवारी, राजकुमार राठौर, सुरेश बुंदेलखंडी, गिरजाशंकर शुक्ला, कृष्ण कुमार आदि मौजूद रहे।