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कबरई कांड के बाद अधिवक्ता की मौत से पुलिस पर खड़े हो रहे सवाल

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महोबा। कबरई के चर्चित क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अधिवक्ता मुकेश पाठक द्वारा गोली मारकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच माह के अंदर व्यापारी व अधिवक्ता की मौत उत्पीड़न व धमकियों से परेशान होने के चलते हुई। क्रशर कारोबारी मामले में जहां तत्कालीन एसपी समेत पांच लोगों पर वसूली का आरोप लगा था, वहीं अधिवक्ता मौत के मामले में ब्लाक प्रमुख कबरई छत्रपाल यादव व उनके साथियों पर 60 लाख रुपये वसूले जाने का आरोप है। सुसाइड नोट में महोबा पुलिस, एसपी व सीओ के दोषियों से मिले होने की बात भी लिखी है। दोनों मामलों में पुलिस की लापरवाही सामने आई है।
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कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने सात सितंबर को सोशल मीडिया में वीडियो वायरल किया था। जिसमें तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार, तत्कालीन थानाध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला समेत पांच लोगों पर छह लाख रुपये की रिश्वत मांगने और न देने पर धमकाने का आरोप लगा था। आठ सितंबर को व्यापारी के गले में गोली लगी थी और 13 सितंबर को मौत हो गई थी। इस मामले में पूर्व एसपी समेत पांच लोगों पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। चार आरोपी जेल में निरुद्घ है जबकि पांच माह का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस 50 हजार के इनामी पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार को गिरफ्तार नहीं कर सकी।
यह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि महोबा के अधिवक्ता मुकेश पाठक के बेटे शिवम पाठक से ब्लाक प्रमुख कबरई व उनके साथियों ने 60 लाख रुपये जबरन वसूले। कई माह भटकने के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की लेकिन आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सके। आरोपियों की धमकी और दहशत में आकर अधिवक्ता ने खुद को गोली मार ली। मृतक ने सुसाइड नोट में महोबा पुलिस, एसपी व सीओ के दोषियों से मिले होने की बात लिखी है। हालांकि एसपी अरुण कुमार श्रीवास्तव आरोपों को खारिज करते हैं। कहते है कि घटना की जांच कराई जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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