पनवाड़ी (महोबा)। 73वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार की ओर से बुंदेली कवि डॉ. अवध किशोर जड़िया को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई। जिले की सीमा से सटे मध्यप्रदेश के हरपालपुर निवासी बुंदेली कवि को यह सम्मान मिलने पर बुंदेलों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। बधाई देने वालों का उनके घर तांता लगा है।
डॉ. जड़िया का जन्म हरपालपुर में 17 अगस्त 1948 को राजवैद्य ब्रजलाल के घर हुआ था। इनके पिता ज्योतिष के ज्ञाता होने के साथ वैद्य व साहित्यकार रहे हैं। पिता से साहित्यिक संस्कार लेकर अवध किशोर ने प्रारंभिक शिक्षा हरपालपुर से की। चिकित्सा से स्नातक डिग्री ग्वालियर विश्वविद्यालय से पूरी की।
डॉ. जड़िया बुंदेली भाषा के साथ ब्रज व हिंदी भाषा में तमाम काव्य रचनाएं लिख चुके हैं। साहित्य के क्षेत्र में उन्हें कई पुरस्कार मिले। वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने डॉ. जड़िया को लोक भूषण सम्मान से नवाजा था। उन्होंने अपने जीवन को साहित्य के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। साहित्य के प्रति डॉ. अवध किशोर के इस समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कविता सुनकर दी थी बधाई
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1973 में अपनी भांजी की शादी में हरपालपुर आए थे। इस दौरान डॉ. अवध किशोर जड़िया ने कविताएं पेश की थीं। पूर्व पीएम ने डॉ. जड़िया की बुंदेली भाषा की कविता सुनकर अगले दिन उन्हें हरपालपुर रेलवे स्टेशन के गेस्ट हाउस में बुलाकर कविताओं के लिए बधाई दी थी। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. जड़िया के घर गए और सबसे मिले थे।
डॉ. जड़िया की साहित्यिक रचनाएं
डॉ. अवध किशोर जड़िया की प्रसिद्ध कविताएं व प्रकाशित कृति में मुख्य रूप से वंदनीय बुंदेलखंड (1977), बुंदेलखंड संस्कृति, कोरा अधर, गोपी गीता, काले कन्हान के कान लगे हैं आदि शामिल हैं। उन्हें उदीयमान मानस मणि, बुंदेली गौरव, कवि शिरोमणि व काव्यरतन की उपाधियां मिली है। उन्हें सर्वधर्म समभाव सम्मान, कालिंजर महोत्सव, काव्यायन, बुंदेली भारती और लोकभूषण सम्मान मिल चुके हैं।