प्रशासनिक उदासीनता के चलते जिले से खेल मैदान गायब हो गए है। खेल के मैदान में इमारतें और सरकारी कार्यालय बनने से बचे मैदान भी दिन प्रतिदिन सिकुड़ते जा रहे है। वहीं तमाम मैदान इमारतों और कार्यालय बन जाने से खत्म हो गए है। जिससे खेल प्रेमियों को मीलों दूर जाना पड़ता है। वहीं खिलाड़ियों ने खोलों से मैदान के अभाव में खोलों से ही किनारा कर लिया है।
मालूम हो कि दो दशक पहले शहर में हथकरघा, पूल्ड हाउस कालोनी, शिवताडंव मैदान, डाकबंगला, बाईपास मैदान, शेखू नगर मैदान, शीतला देवी मैदान सहित एक दर्जन मैदान थे। जहां पर सुबह शाम लोग हाकी, क्रिकेट, फुटबाल जैसे खेल खेला करते थे। लोगों में खेलों के प्रति विशेष उत्साह था, लेकिन तेजी से शहर का विकास होने के साथ-साथ नई नई इमारतों, सरकारी कालोनियां, कार्यालय बनने से खेल मैदान खत्म होते जा रहे हैं।
पूल्ड हाउस मैदान में एक दर्जन से ज्यादा तीन तीन मंजिला इमारतें बन गई, जिससे अब यह मैदान पूरी तरह खत्म हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते तमाम मैदानों पर अवैध कब्जे हो गए। जिससे मैदान सिकुड़ते गए। डाकबंगला मैदान में सरकारी कार्यालयों के निर्माण होने से मैदान आधा रह गया है, जिससे अब यहां पर न तो टूर्नामेंट हो पाते और न ही लोग खेलने पहुंचते हैं।
बाइपास मैदान में दुकानें बन जाने के कारण मैदान खत्म हो गया है, वहीं शिव तांडव मैदान की जुताई कर खेत बना दिया गया है। हाकी के पूर्व प्रदेश स्तरीय खिलाड़ी मोहम्मद रईस खान कहते हैं कि तीन दशक पहले मोहल्ले मोहल्ले में मैदान थे, जिससे हर मोहल्ले में हाकी का खेल होता था। यही वजह है कि प्रदेश स्तर तक मुझे हाकी खेलने का मौका मिला, लेकिन मौजूदा समय में खेल मैदान खत्म हो गए हैं, जिससे खिलाड़ी भी अब खेल के प्रति रुचि नहीं लेते हैं।
खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा स्टेडियम का लाभ
जनपद गठन के बाद महोबा में बनाया गया इकलौता स्टेडियम जिला मुख्यालय से पांच किमी. दूर होने के कारण खिलाड़ी वहां नहीं पहुंच पाते, जिससे स्टेडियम भी बेमतलब साबित हो रहा है। अब स्टेडियम महज लोगों के घूमने व प्रतियोगिताएं कराने तक सीमित होकर रह गया है। शहर से बाहर स्टेडियम बनाए जाने से खिलाडिय़ों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सूखे तालाबों में खेल रहे खिलाड़ी
दो साल से बारिश न होने से तालाब और पोखरे सूख जाने के कारण मैदान बनकर रह गए, जिसके चलते खिलाड़ियों ने इन सूख पड़े तालाबों में ही मैदान बनाकर क्रिकेट, हाकी, फुटबाल आदि खेल रहे हैं। इतना ही इन सूखे तालाबों में लोगों द्वारा क्रिकेट टूर्नामेंटों का आयोजन भी कराया जा रहा है। मानू, दयाशंकर, इमरान, सुहेल आदि का कहना है कि शहर के सभी खेल मैदान खत्म हो गए हैं और स्टेडियम दूर होने के कारण इन सूखे तालाबों में खेल कर तसल्ली कर रहे हैं।
खेल मैदानों में कही पर भी अवैध कब्जों की शिकायत नहीं आई। यदि कहीं खेल मैदानों में कब्जे किए जाने की शिकायत मिलगी तो अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे।
एसपी सिंह
उपजिलाधिकारी