महोबा। वैश्विक कोरोना महामारी के चलते इस साल चरखारी में एतिहासिक दुलदुल जुलूस नहीं निकाला गया। मोहर्रम की सातवीं तारीख पर भीड़ भी नहीं जुटी। जिससे पहली चरखारी में सन्नाटा दिखाई दिया।
मोहर्रम की पहली तारीख से अलम, ढोल जुलूस, मेहंदी, बुर्राक आदि किसी भी तरह के जुलूस नहीं निकाले गए और न ही इमाम चौकों पर मर्सिया पढ़े गए। यहां तक कि तमाम इमामबाड़ों के ताले तक नहीं खुले। जिससे ताजिया बनने का कार्य भी शुरू नहीं हो सका। मोहर्रम की एक से 10 तारीख तक जिले में दिखाई देने वाली खासी चहल और मजलिसों का सिलसिला भी थम गया। मजलिस की आवाज भी नहीं सुनाई दे रही हैं। मोहर्रम कमेटी द्वारा भी मोहर्रम त्योहार की कोई तैयारियां नहीं की गई। मोहर्रम की सातवीं तारीख को मन्नत पूरी होने पर दुलदुल पर नींबू चढ़ाने और जलेबी खिलाने की परंपरा है, लेकिन इस साल महामारी के चलते मिठाई दुकानदारों, नींबू व फूल विक्रेताओं सहित तमाम लोगों की रोजी-रोटी भी छिन गई।