बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत करोड़ों रुपये दिए जाने के बाद भी बुंदेलखंड के अधिकारी 43 फीसदी ही पैसा खर्च कर सके हैं। यही वजह है कि बुंदेलखंड में रोजगार के साधन सृजित न होने और फसलों के बर्बाद होने से किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। ये बात समाजसेवी एक्शन एड के कार्यक्रम अधिकारी राजन सिंह ने कही।
मंगलवार को अरुणोदय संस्थान कार्यालय में किसान आत्महत्या पर विचार मंथन गोष्ठी के मौके पर उन्होंने कहा कि एक लाख रुपये तक के लोन पर किसानों की चल और अचल संपत्ति बंधक नहीं की जा सकती। इसके बाद भी किसानों की जमीन बंधक की जा रही है।
बैंकों में दलालों के माध्यम से किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बन रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि अधिकारियों की हीलाहवाली के चलते बुंदेलखंड विशेष पैकेज की पूरी धनराशि खर्च नहीं हो पा रही है। बुंदेलखंड के किसान कामकाज के लिए पलायन कर रहे हैं।
जन पैरवी मंच के प्रदेश संयोजक अजय शर्मा ने कहा कि सूखे की विभीषिका से जूझ रहे बुंदेलखंड को राहत देने के लिए वर्ष 2009 में बुंदेलखंड राहत पैकेज की घोषणा की गई। जिसमें कुल 7,266 करोड़ में से 3506 करोड़ रुपये प्रदेश को आवंटित किए गए।
उन्हाेंने कहा कि ग्राम सभाआें को ताकतवर बनाने की जरूरत है। जानवरों को चारा पानी की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। उनकी कर्ज माफी के मुद्दे पर बातचीत होनी चाहिए। इस मौके पर अरुणोदय संस्थान के निदेशक अभिषेक मिश्रा, शिप्रा, देवेंद्र कुमार सहित तमाम लोगों ने विचार व्यक्त किए।