महोबा। वीरभूमि के ऐतिहासिक चंदेलकालीन तालाब जल्द ही जलकुंभी के अभिशाप से मुक्त होंगे। इनमें फिर से निर्मल और साफ पानी दिखेगा और तैरती मछलियां और अन्य जलीय जीव-जन्तुु भी दिखाई देंगे। यह सब होगा नियो किटीना विविल कीट से, जो तालाबों की जलकुंभी को खत्म कर देगा। जलकुंभी के सफाए की शुरुआत कल्याण सागर तालाब से होगी। शुरुआत में इसमें एक लाख कीट डाले जाएंगे।
तालाबों की सुंदरता को लौटाने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए डीएम सत्येंद्र कुमार ने खरपतवार शोध निदेशालय जबलपुर से संपर्क किया था। इस पर निदेशालय के वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार और उनकी टीम ने कल्यान सागर, कीरत सागर, मदन सागर और बेलाताल तालाबों का नावों से भ्रमण कर जायजा लिया और कार्य योजना बनाई।
तालाबों की जलकुंभी नष्ट करने के लिए टीम नियो किटीना विविल कीट तालाबों में डालेगी। इस कार्य योजना को अमली जामा पहनाने के लिए नगर पालिका क्षेत्र के कल्याण सागर तालाब में इसकी शुरुआत होगी जिसमें एक लाख वीविल कीट डाले जाएंगे। इसके बाद जिले के सभी तालाबों में इसका प्रयोग किया जाएगा।
ऐसे कार्य करता है नियो किटीना विविल कीट
नियो किटीना विविल एक प्रकार का कीट है, जो जलकुंभी को नष्ट करता है। यह कीट पांच महीने में जलकुंभी के पुष्प निकलने पर रोक लगा देगा। जलकुंभी को पूरी तरह खत्म करने में दो साल से अधिक का समय लेगा। इससे तालाब में फिर से पानी नजर आएगा। जलकुंभी और गंदगी से तालाब मुक्त हो जाएगा। एक कीट की कीमत करीब छह रुपये होगी, जिसका भुगतान नगर पालिका करेगी।
तालाबों में जलकुंभी सबसे बड़ी समस्या है। इससे जल संरक्षण में समस्या आ रही है। इसको लेकर खरपतवार शोध निदेशालय जबलपुर से संपर्क किया है। वैज्ञानिकों ने तालाबों का निरीक्षण कर कीट द्वारा जलकुंभी को नष्ट करने का प्लान बनाया है।- सत्येंद्र कुमार, डीएम महोबा।