जिले में दूध के कारोबार को विकसित करने के लिए खोली गई 110 दुग्ध समितियां बंद पड़ी है। जिससे सौ फीसदी धनराशि अवमुक्त होने के बाद भी एक लीटर दूध भी जिले की समितियों से प्राप्त नहीं हो रहा है। ग्राम पवा में बनाया गया दुग्ध संग्रहण केंद्र के तीन साल से खराब होने से दूध व्यापारियों द्वारा लिए गए दूध को भी हमीरपुर जिले के सुमेरपुर चिल्ड प्लांट भेजा जा रहा है। जिससे योजना में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी समिति और दुग्ध संग्रहण केंद्र बंद होने से शोपीस बन कर रह गए। दुग्धशाला विकास विभाग उप्र म के अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से चलते बुंदेलखंड पैकेज से 80 और जिला योजना के तहत 30 कुल मिलाकर 110 दुग्ध समितियों का गठन किया, जिनमें से एक भी समिति संचालित नहीं हैं।
मालूम हो कि बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत 80 और जिला योजना से 30 समितियों का गठन किया गया था। जैतपुर विकासखंड में 31, कबरई में 42, पनवाड़ी व चरखारी 27-27 कुल मिलाकर 110 समितियां विभाग में पैसा न होने के कारण बंद चल रहीं हैं। 9 अगस्त 2014 को जिला योजना में दुग्ध संगठन के लिए डेरी प्लांट का प्रस्ताव डीएम के माध्यम से शासन को भेजा गया था, लेकिन इसका कोई लाभ जिले को हासिल नहीं हो सका। खन्ना रूट में गाडियां लगाकर यहां दूध लाने ले जाने का कार्य किया जा रहा था, लेकिन गाडिय़ों का पैसा न मिलने के कारण ट्रांसपोर्ट ठप हो गया है।
विकासखंड कबरई के ग्राम पवा में समितियों और दूध व्यापारियों के माध्यम से प्राप्त दूध को स्टोर करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर दुग्ध संग्रहण केंद्र बनाया गया। पिछले तीन समय से खराबी के चलते दुग्ध संग्रहण केंद्र चालू नहीं हो सका। जिले के दुग्ध निरीक्षक रामशरण प्रजापति ने बताया कि जिले के दुग्ध विकास के लिए कई योजनाएं बनाकर शासन को जिलाधिकारी के माध्यम से भेजी गई थीं, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकीा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में केवल किसानों के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण का पैसा आया था, जिसके अतंर्गत राष्ट्रीय डेयरी विकास संस्थान करनाल हरियाणा के माध्यम से प्रशिक्षण कराया गया था। अब विभाग के पास पैसा नहीं हैं बिना धन के विभाग चल रहा है।उन्होंने बताया कि जिले में एक भी चिल्ड प्लांट नहीं है। जिलाधिकरी के माध्यम से जिले में चिल्ड प्लांट की स्थापना के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन वह भी आज तक स्वीकृत नहीं हो सका।