रोडवेज डिपो की जर्जर इमारत के तोड़े जाने से डिपो परिसर में बस यात्रियों
के लिए खड़े रहने की जगह नहीं बची है। चारो ओर मलवा पड़ा होने से एक-दो
बसें ही खड़ी हो पा रही है। बस यात्रियों को मजबूरन सड़क पर ही बसों का
इंतजार करना पड़ रहा है। डिपो में बारिश का पानी भरा होने से बसों में
चढ़ना मुश्किल है।
ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी महोबा रोडवेज डिपो
की इमारत अब जर्जर हो गई है। शासन ने महोबा डिपो को मॉडल रोडवेज डिपो बनाने
के लिए छह करोड़ रुपया जारी किया है। अब तीन मंजिला रोडवेज डिपो का
निर्माण कराया जाएगा।
इसके निर्माण के लिए समाज कल्याण निर्माण
निगम को जिम्मेदारी दी गई है। कार्यदाई संस्थान ने इमारत को तोड़ना शुरू कर
दिया है। जगह जगह मलबा पड़ा है। विभिन्न रुटों के लिए जाने वाली रोडवेज
बसों के यात्री अब इधर उधर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं।
रोडवेज परिसर में थोड़ी बहुत जगह बचने के कारण अब विभाग ने डिपो के बाहर से सड़क पर बसों का संचालन शुरू कर दिया है।
बेहद
संकरे रोड पर बसों के खड़े होने से जाम जैसे हालात रहते हैं। रोडवेज की
एक साथ कई कई बसें सड़क पर आगे पीछे खड़ी होने से पूरे जाम जैसे हालात रहते
हैं। वहीं यात्रियों को सड़कों पर खड़े होकर सामान रखने व उतरने में
दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
रोडवेज की बाउंड्री से सटाकर रखीं गई गुमटियां और लकड़ी के डिब्बे न हटाने से रोडवेज बसों के संचालन में दिक्कत हो रही है।
एक
माह पहले उप जिलाधिकारी सदर प्रबुद्घ सिंह और आरएम बांदा ने गुमटी और
डिब्बे हटाने का अल्टीमेटम दिया था। इन दुकानदारों ने गुमटी से सामान तो
हटा लिया, लेकिन डिब्बे और गुमटियां नहीं हटाई हैं। डिपो के अंदर आने जाने
के लिए मात्र एक गेट होने से बस चालकों को परेशानी हो रही है।