महोबा जिले में हुए पंचायत चुनाव ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। जिसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनाव में पड़ेगा। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने और बुंदेलखंड में सभी विधायक व सांसद पार्टी के होने के बाद भी जिले में जिला पंचायत सदस्य की 14 सीटों में महज तीन सीटें ही भाजपा के खाते में गईं।
दलीय उम्मीदवारों में सपा ने सबसे ज्यादा पांच सीटें हासिल कर राजनीतिक समीकरण बिगाड़ दिए हैं। चुनाव में भाजपा को भितरघात भारी पड़ी। चुनाव हारे प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया में स्वयं इसे हार का कारण बताया। जिले में 15 अप्रैल को प्रथम चरण में पंचायत चुनाव का मतदान हुआ था।
प्रदेश में भाजपा की सरकार होने और जिले में सांसद व दोनों विधायक भाजपा के होने के चलते जिला पंचायत सदस्य पद के लिए उम्मीदवारों में टिकट पाने की होड़ मची रही। जिन पदाधिकारियों को भाजपा से टिकट नहीं मिला, वह बगावत पर उतर आए और निर्दलीय ताल ठोंक दी। जिससे भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आई।
इसका नतीजा यह हुआ कि 14 में से महज तीन सीटें ही भाजपा के खाते में गईं जबकि सपा को पांच सीटें मिली। वहीं छह निर्दलीय जीत दर्ज करने में सफल रहे। जिससे निर्दलीय उम्मीदवार में से ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशियों ने हार के बाद सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाली।
किसी ने भाजपा पदाधिकारियों के ही भितरघात करने तो किसी ने चुनाव दौरान सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए हार का प्रमुख कारण बताया। कुछ भी हो लेकिन पंचायत चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है। ऐसे में वर्ष 2022 में होने वाले चुुनाव के राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। भाजपा पदाधिकारी पंचायत चुनाव के निराशाजनक प्रदर्शन पर मंथन करने में जुट गए हैं।