अजनर (महोबा)। लॉकडाउन के बाद महानगरों में फंसे श्रमिक ट्रकों, पिकप और पैदल चलकर किसी तरह घर पहुंच रहे हैं। शनिवार को दिल्ली और गुजरात से लौटे करीब 300 श्रमिक भूखे-प्यासे दिखाई दिए। श्रमिकों को बगरौनी और कैमाहा बॉर्डर पर प्रशासन व ग्रामीणों ने भोजन कराया। इसके बाद प्रशासन ने रोडवेज बसों से सभी को उनके गृह जनपद भेज दिया।
महानगरों से प्रवासी श्रमिकों के आने का सिलसला अभी भी जारी है। प्रवासी श्रमिकों की आप बीती सुनकर लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। मुसीबत के मारे श्रमिक कई-कई दिन तक भूखे रहने के बाद मजबूर होकर घरों की तरफ निकल पड़े। विकासखंड जैतपुर के बुधौरा गांव के प्रमोद कुमार पत्नी माया, बेटे प्रदीप (12), अजय (8) बेटी कृष्ण कुमारी (10) के साथ दिल्ली के हरिनगर में चार साल से रह रहा था। वहां पर राजमिस्त्री का काम करता था। लॉकडाउन के चलते सबकुछ थम गया। मकान का किराया अदा न कर पाने पर मकान मालिक ने घर से बाहर निकाल दिया। फुटपाथ पर 15 दिन तक खाना बनाया। इसके बाद परिवार के साथ ट्रक से आगरा तक आया।
आगरा से झांसी तक दूसरे ट्रक से आए। फिर अखबार की गाड़ी से नौगांव आने के बाद 25 किलोमीटर पैदल चलकर गांव बुधौरा पहुंचा। इसके अलावा तमाम श्रमिक बेलाताल पहुंचे। कैमाहा बॉर्डर में आए 300 से ज्यादा श्रमिकों को प्रशासन ने रोडवेज बसों ने प्रतापगढ़, इलाहाबाद, संतकबीर, कौशांबी समेत कई जिलों में रोडवेज बसों से भिजवाया। वहीं, कैमाहा बॉर्डर पर पहुंचे कई श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।