श्रीनगर (महोबा)। लॉकडाउन बढ़ने के बाद महानगरों में रहने वाले श्रमिकों का सब्र का बांध टूट गया। अब मजदूर ट्रकों व अन्य साधनों के अलावा पैदल ही अपने गृह जनपदों की तरफ कूच कर रहे हैं। प्रांतों की सीमा पर लगी पुलिस फोर्स से बचने के लिए लोग खेत-खलिहानों के रास्ते सीमा पार कर रहे हैं।
इससे पुलिस को महानगरों से आने वाले लोगों की भनक तक नहीं लग रही है। शुक्रवार को पुलिसकर्मियों ने 12 श्रमिकों को वापस मध्य प्रदेश भेज दिया। 14 अप्रैल को पुन: लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद महाराष्ट्र में फंसे तमाम श्रमिक अपने घरों के लिए पैदल निकल लिए।
बलरामपुर निवासी सुशील और गोंडा निवासी फूलसिंह का कहना है कि करीब 200 किमी पैदल चलने के बाद ट्रक मिला। इसमें बैठकर वह मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में उतर गए। इसके बाद छतरपुर से महोबा के लिए पैदल चल दिए। यूपी और एमपी की सीमा पर पुलिस देख श्रमिक हाईवे छोड़कर खेत-खलिहानों घुस गए। वहां से सीमा पार कर वह अंधेरे में श्रीनगर गांव घुस गए। गांव में अनजान श्रमिकों को देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। रात में ही जिले के श्रीनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और सभी 12 श्रमिकों को खेत के रास्ते से वापस मध्य प्रदेश भेज दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
अब श्रमिक एमपी में इधर-उधर भटक रहे हैं। यूपी-एमपी की सरहद पर लगे पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी कर रहे है। इससे अन्य प्रांतों से आने वाले श्रमिक हाईवे से न आकर खेत-खलिहानों के रास्ते जिले में प्रवेश कर रहे हैं। गुरुवार की रात को श्रीनगर पहुंचे श्रमिकों में श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच और गोंडा के श्रमिक शामिल हैं।