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दूसरों की जिंदगी बचाने के साथ दे रहे इंसानियत का संदेश

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आल्हा चौक स्थित मुख्य सड़क पर ड्यूटी करती पुलिस - फोटो : MAHOBA
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महोबा। कोरोना से जंग जीतने को जिले में लागू लॉकडाउन का पालन कराने में पुलिस को पसीना आ रहा है। चिलचिलाती धूप व लू के थपेड़ों की परवाह किए बिना पुलिस कर्मचारी चौराहों और सड़कों पर डटे हैं। महिला सिपाही भी किसी से कम नहीं हैं।
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सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक एक ही स्थान पर नाश्ते के भरोसे पुलिस कर्मचारी बखूबी ड्यूटी निभा रहे हैं। कोरोना की जंग लड़ रहे सिपाहियों की मंशा दूसरों की जिंदगी बचाने के साथ इंसानियत का संदेश देना है। कहीं से लंच पैकेट आ गया तो दोपहर में भोजन कर लिया अन्यथा फर्ज के लिए भूखे ही सही जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
थक जाने पर सुबह का भोजन कर सो जातीं: कन्नौज निवासी शीतल यादव और ललितपुर निवासी मनीषा पटेल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट महोबा में तैनात है, लेकिन लॉकडाउन के चलते अदालतों के बंद होने से दोनों सिपाहियों की ड्यूटी कबरई ब्लॉक तिराहे में लगी है।
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दोनों महिला सिपाही परिवार को छोड़कर महोबा में अकेले नौकरी कर रहीं हैं। वे कहतीं है कि सुबह उठकर जल्दी-जल्दी खाना बनाती हैं लेकिन आठ बज जाने के कारण बिना भोजन किए ड्यूूटी पर पहुंच जाती हैं। सारा दिन खड़े रहने के कारण पैर काम नहीं करते। थक जाने के कारण रात में खाना नहीं बना पाते। सुबह के रखे भोजन को खाकर सो जाते हैं।
फर्ज के लिए नहीं करते खानपान की चिंता: राजस्थान प्रांत के धौलपुर निवासी कृष्ण कुमार प्रयागराज में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। उन्हें लॉकडाउन के दौरान महोबा भेज दिया गया है। कभीकभार मेस में जाकर खाना खा लेते हैं कभी फल से ही काम चलाते हैं। 12 घंटे की ड्यूटी के दौरान खासी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन फर्ज के लिए प्रचंड गर्मी और तेज धूप भी हौसला नहीं डिगा पाती।
कभी-कभार भोजन तक नहीं होता नसीब: बलिया निवासी कौशल सिंह प्रयागराज में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। डयूटी में महोबा भेज दिया गया है। बुंदेलखंड में अधिक गर्मी और तेज धूप पड़ती है। वे ऐसी चिलचिलाती धूप में सारा दिन खड़े रहकर लोगों को लॉकडाउन का पालन करा रहे हैं। कभी-कभार तेज धूप और ड्यूूटी के कारण दोपहर का भोजन भी नसीब नहीं हो पाता। शाम को परिवार से बात होने पर परिजन सावधानी से ड्यूटी करने को कहते हैं।
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