महोबा। बुंदेली लोक कला संस्कृति में अहम स्थान रखने वाले आल्हा गायन के दिन बहुरने का समय आ रहा है। वीर आल्हा ऊदल की नगरी महोबा में आल्हा गुरुकुल की स्थापना की जाएगी। इसे लेकर जहां जिला प्रशासन ने कवायद शुरू की है। वहीं, प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने भी अपनी सहमति जताई है। सब कुछ ठीक रहा तो महोबा में अनूठा गुरुकुल बनेगा। इसमें बुंदेली लोककला के विद्वान युवा पीढ़ी को आल्हा गायन की बारीकियां सिखाकर अपनी लोककला विरासत में पारंगत करेंगे।
आल्हा गायन यहां के राजाओं और वीरों की वीरता का बखान करता है। पीढ़ी दर पीढ़ी आल्हा गायन की परंपरा चली आ रही है। कजरी महोत्सव के दौरान तो महोबा शहर के चप्पे-चप्पे में आल्हा गायन की धुन सुनाई देती है, लेकिन जब से वीडियो के जरिए आल्हा गायन की प्रस्तुतियां होने लगी है, तब से मंचीय कलाकारों की उपेक्षा देखी गई है। युवा पीढ़ी अपनी इस लोक कला की विरासत से अनभिज्ञ होती जा रही है। ऐसे में जिला प्रशासन ने आल्हा गायन को संजीवनी देने के लिए महोबा में आल्हा गुरुकुल स्थापित करने का खाका तैयार किया है।
डीएम सत्येंद्र कुमार ने आल्हा गुरुकुल के लिए कुछ स्थान देखे हैं। इसमें पचपहरा रोड स्थित पंचायत रिसोर्स सेंटर और छतरपुर रोड स्थित एससीएसटी छात्रावास की पुरानी बिल्डिंग को देखा गया है। डीएम ने बताया कि गुरुकुल अकादमी खोले जाने का प्रस्ताव अगले सप्ताह तक संस्कृति विभाग को भेज दिया जाएगा। आल्हा गुरुकुल में आल्हा गायन के प्रदेश स्तरीय कलाकार अथवा संगीत के विद्वानों को रखा जाएगा।