फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो पोकलेंड मशीनों के सहारे मदन सागर सरोवर की खुदाई

Wed, 25 May 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
विज्ञापन
मदन सागरसरोवर की खुदाई करती पोकलेंड मशीन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
महोबा। शहर के चंदेल कालीन सरोवर मदन सागर की खुदाई में लगाई गई मशीनें ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। 103 हेक्टेयर के बड़े भू भाग में फैले इस सरोवर में महज दो पोकलेंड मशीनों से खुदाई कराई जा रही है। जिससे बारिश शुरू होने तक तालाब की दस फीसदी भी खुदाई होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन



 शहर के बीचों बीच और गोखार पहाड़ के नजदीक वर्ष 1182 में मदन सागर सरोवर का निर्माण कराया था। लेकिन तब से आजतक इस सरोवर की खुदाई नहीं कराई गई। जिससे सरोवर में कई कई फीट सिल्ट जमा हो गई है और सरोवर की भंडारण क्षमता घट गई। इस साल सिंचाई विभाग मदन सागर सरोवर की खुदाई का कार्य करा रहा है। खुदाई के लिए दो पोकलेंड मशीनें लगाई गई है। जिससे बारिश तक समूचे सरोवर की खुदाई नहीं हो सकेगी।


मालुम हो कि जिले में बड़े पैमाने पर तालाबों की खुदाई का कार्य चल रहा है। कस्बा चरखारी में आठ तालाबों के अलावा पनवाड़ी, देवगनपुरा, किड़ारी, रैपुरा, थाना, पसवारा, रिवई, बसौठ सहित तमाम गांव में मनरेगा के तहत तालाबों की खुदाई का कार्य चल रहा है। जबकि सिजहरी, श्रीनगर, रहेलिया, महोबा, चरखारी में दिन रात जेसीबी और पोकलेंड मशीनें सरोवरों की खुदाई कर रही है। लेकिन 103 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मदन सागर सरोवर में महज दो पोकलेंड मशीनों के भरोसे खुदाई हो रही है। इस सरोवर में खुदाई के नाम रस्म अदायगी की जा रही है।
विज्ञापन



पुरातत्व विभाग ने खुदाई में डाला रोड़ा
मदन सागर के बीचोबीच ऐतिहासिक चंदेलकालीन खखरामठ स्थित है। पुरातात्विक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए पुरातत्व विभाग ने कार्यदायी संस्था को खखरामठ स्मारक से 100 मीटर के आस पास खुदाई करने पर रोक लगा दी है। जिससे खुदाई में जुटे ठेकेदारों ने मशीनों को खखरामठ के पास से हटाकर 100 मीटर की दूरी पर खुदाई का कार्य शुरू करा दिया है।


पहली दफा कराई जा रही खुदाई
शहर के मोहल्ला मकनियापुरा निवासी मोहम्मद निसार (85) का कहना है कि पहली दफा मदन सागर सरोवर की खुदाई होने से जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी। साथ ही शहरियों को पानी की समस्या से भी निजात मिलेगी। लेकिन इतने बड़े तालाब में दो मशीनों से खुदाई कराना बेमतलब साबित हो रहा है। वर्ष 2008 में मजदूरों ने नाममात्र की खुदाई की थी।


खुदाई में और बढ़ाई जाए मशीनें
बड़ीहाट निवासी रामेश्वर(72) कहते है कि उन्होंने अपने जीवन काल में कभी मदन सागर सरोवर की मशीनों से खुदाई होती नहीं देखी। अब मशीनें लगने से तालाब की खुदाई होने की उम्मींद जागी है। लेकिन जेसीबी और पोकलेंड मशीनें बढ़ाई जानी चाहिए। तभी बारिश से पहले खुदाई हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें