महोबा। वीर आल्हा-ऊदल की नगरी महोबा की शान कहे जाने वाले ऐतिहासिक मदन सागर तालाब की सुंदरता पर ग्रहण लग गया है। इसके चारों तरफ फैली जलकुंभी साफ कराने के लिए जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। तालाबों की जलकुंभी साफ कराने के लिए खरीदी गई मशीन शोपीस बनी है। सफाई न होने से नागरिकों में नाराजगी व्याप्त है।
मदन सागर में तो तालाब के किनारे तक जलकुंभी का मकड़जाल फैला हुआ है। जलकुंभी को साफ कराने के लिए नगर पालिका महोबा की ओर से चार साल पहले करीब 1.28 करोड़ की लागत से मशीन मंगाई गई थी। पालिका के जिम्मेदारों का कहना था कि अब केरल की तर्ज पर शहर के तालाबों की सफाई कराई जाएगी। शुरूआत में कुछ दिन मदन सागर तालाब की जलकुंभी साफ की गई लेकिन इसके बाद जलकुंभी साफ करने का काम ठप हो गया। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते मदन सागर तालाब में जलकुंभी चारों तरफ फैली है। इसी तालाब के शहर के कुछ वार्डों को पाइपलाइन के सहारे पेयजल आपूर्ति दी जाती है। जलकुंभी के कारण तालाब का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।
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महोबा। समाजसेवी तारा पाटकार का कहना है कि मशीन की कीमत बहुत ज्यादा अदा की गई। इतनी कीमत में यदि मानव श्रम से काम कराकर जलकुंभी की सफाई कराई जाती तो इससे मजदूरों को काम मिलता और अब तक तालाबों की सफाई हो चुकी होती।
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महोबा। हरिओम ताम्रकार का कहना है कि शहर के तालाब महोबा की धरती की ऐतिहासिक धरोहर हैं। मदन सागर तालाब की सफाई और इनकी सुंदरता को बनाए रखने के लिए जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए। जल्द से जल्द जलकुंभी साफ होनी चाहिए। ताकि, मदन सागार का पुराना वैभव लौट सके।
ये है मदन सागर का इतिहास
महोबा। गोखारगिरि पर्वत के किनारे तत्कालीन चंदेल नरेश मदन वर्मन ने वर्ष 1129 से 1163 के बीच 34 वर्षों के अथक प्रयास के बाद मकरध्वज नदी पर बांध बनवाकर खूबसूरत मदन सागर झील का निर्माण कराया था। चार वर्ग किलोमीटर में फैली इस झील के मध्य में खजुराहो स्थापत्य कला शैली में बना खखरामठ (शिवालय) अपने आप में अद्भुत तीर्थ है। झील के मध्य में पांच द्वीप हैं। जिसमें खखरामठ के अलावा मझारी द्वीप प्रमुख है।
- अभी मशीन कीरत सागर तालाब में है। जल्द ही मशीन मदन सागर तालाब में भेजकर जलकुंभी साफ कराई जाएगी।- अवधेश कुमार, ईओ नगर पालिका महोबा।