महोबा। अपर जिला सत्र न्यायाधीश विजय शंकर उपाध्याय ने डकैती के मामले में गृहस्वामी द्वारा विरोध करने पर हत्या किए जाने के मामले में आजीवन कारावास और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है। अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है।
कस्बा चरखारी के मोहल्ला चिंतेपुरा निवासी वीरपाल पुत्र विश्वनाथ 26 दिसंबर 2007 को अपनी बहून को लेने दिल्ली गया था। घर में उसकी पत्नी हिरिया, बेटी मालती (18) व भांजी प्रीति आठ थी। मौके का फायदा उठाकर 30 दिसंबर 2007 को रात्रि दो बजे मोहल्ले के ही जग्गू व राजू एवं रूपनगर चरखारी निवासी छोटे सिंह ने मकान की कुंडी खुलवाकर अंदर प्रवेश किया और बेटी मालती को ले जाने लगे।
विरोध करने पर तीनों बदमाशों ने हिरिया की कुल्हाड़ी व धारदार हथियार से हमलाकर हत्या कर दी और फिर सोने चांदी के जेवरात व अन्य सामान लूट ले गए। अगले दिन वीरपाल के लौटने पर मालती ने घटना की जानकारी दी। वीरपाल ने उक्त तीनों बदमाशों के खिलाफ चरखारी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
अदालत ने गुरुवार को मुकदमे की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद छोटे सिंह को डकैती के मामले में आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। माल बरामदगी के मामले में तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। तीनों सजाएं साथ साथ चलेंगी।
इस मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की। अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है। गौरतलब है कि 28 अक्तूबर 2014 को अदालत ने राजू व जग्गू को पूर्व में ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। छोटे सिंह के फरार होने के चलते उसे गुरुवार को सजा सुनाई गई।