महोबा। जनपद में प्रस्तावित 100 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना के लिए नौ माह बाद भी जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। ऐसे में एक ही स्थान पर अलग-अलग सेक्टर की छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव अधर में लटक गया है।
जनपद में औद्योगिक विकास के लिए 100 एकड़ जमीन पर सरदार वल्लभ भाई पटेल एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की जाना है। शासन की ओर से इसको लेकर करीब नौ माह पहले निर्देश जारी किए गए थे। पार्क के तैयार होने पर यह जनपद का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होगा। राजस्व विभाग को जल्द से जल्द भूमि की तलाश पूरी किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
कहा गया था कि पर्याप्त भूमि मिलने के बाद इसे एमएसएमई विभाग के नाम हस्तांतरण किया जाए। ताकि चिह्नित होने वाली जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो सके। साथ ही प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क में बिजली, पानी, मार्ग, प्रकाश आदि की व्यवस्था उद्योग विभाग की ओर से कराने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके नौ माह का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। जमीन के अभाव में इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना अधर नहीं हो पा रही है। उधर, उपायुक्त उद्योग महेशचंद्र सरोज का कहना है कि 100 एकड़ में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क आधुनिक तरीके से तैयार किए जाने के लिए सौ एकड़ जमीन की जरूरत है। अभी तक एक ही स्थान पर सौ एकड़ जमीन नहीं मिली। इससे इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना नहीं हो पा रही है।
एमएसएमई की ओर से विकसित किया जाना है इंडस्ट्रियल पार्क
यदि इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना होती है तो जिले में उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। स्थानीय उद्यमियों को सस्ते दामों पर उनके उद्यम के लिए जमीन दिए जाने का भी प्रावधान है। यह औद्योगिक पार्क एमएसएमई की ओर से विकसित किया जाना प्रस्तावित है। बावजूद इसके भूमि के अभाव में 100 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना नहीं हो पा रही है।
एक ही स्थान पर चाहिए 100 एकड़ जमीन
योजना के तहत इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना के लिए एक ही स्थान पर विभाग को 100 एकड़ सरकारी जमीन चाहिए। कई स्थानों पर जमीन की तलाश की गई लेकिन इतने बड़े क्षेत्रफल में जमीन नहीं मिल पा रही है। जहां जमीन मिल भी रही है तो वह 100 एकड़ के दायरे में नहीं है। इससे भूमि चयन की प्रक्रिया अधर में लटकी है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों की ओर से भूमि की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल सकी।