जिले में राजस्व की दृष्टि से हर माह कुल बिजली राजस्व का 75 प्रतिशत भुगतान वाले कबरई कस्बे के लोगों को बिजली का पर्याप्त वोल्टेज मिलने के साथ आपूर्ति में भी सुधार हो सकेगा। ताकि जिले के महत्वपूर्ण पत्थर उद्योग को गति दी जा सके। यहां बिजली विभाग ने 132 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
कबरई कस्बे में 300 से अधिक स्टोन क्रेशर प्लांट लगे हुए हैं, यहां से प्रतिमाह तीन करोड़ रुपये से अधिक मासिक बिजली के बिल की अदायगी क्रेशर प्लांटों द्वारा की जाती है। जिले के कुल बिजली राजस्व का एक बड़ा हिस्सा कबरई मंडी द्वारा भुगतान किया जाता है। बावजूद इसके यहां बिजली की बेहिसाब कटौती और लो वोल्टेज होने से मंडी के लोग परेशान थे। क्रेशर यूनियन द्वारा मांग और राजस्व के अनुरूप कबरई के पावर हाउस 33 केवी को बढ़ाने की मांग की जा रही थी, ताकि इस उद्योग को गति दी जा सके।
शासन के निर्देश पर कबरई तिराहे में 33 केवी पावर हाउस के स्थान पर 132 क ेवी सब स्टेशन बनाया जाएगा, जिसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। अधिशाषी अभियंता ट्रासंमिशन बांदा ने कबरई के प्रस्तावित 132 केवी पावर हाउस के बारे में बताया कि इसकी लागत कुल 12 करोड़ रुपये आएगी, जिसका अनुमोदन मुख्य अभियंता दक्षिणंाचल विद्युुत वितरण निगम लि. ने शासन को अंतिम बजट स्वीकृति के लिए भेज दिया है। पैसा मिलते ही इस पर काम शुरू करा दिया जाएगा और एक साल के अंदर इसका निर्माण कार्य भी पूरा करा दिया जाएगा।
इंसेट
बिजली कटौती से पत्थर कारोबार पर संकट
कबरई। बिजली समस्या के चलते पत्थर करोबार पर संकट मंडराने लगा है। घंटों बिजली गायब रहने से क्रेशर प्लांट बंद रहते हैं। क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली की कटौती और लो वोल्टेज के कारण 500 करोड़ का कारोबार करने वाले पत्थर उद्योग नगरी में संकट मंडरा रहा था, लेकिन अब इस उद्योग के अच्छे दिन आएंगे और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। बिजली कमी से यहां उत्पादन स्तर गिर गया था, जिससे रोजगार के अवसर भी घट गए थे।
डीजल से होता है भारी नुकसान
पत्थर व्यवसायिक नगरी कबरई में बिजली से आजिज आ चुके तमाम क्रेशर संचालकों ने लाखों रुपए के जनरेटर खरीद लिए गए, इससे प्रतिदिन हजारों रुपए का डीजल खपाना पड़ रहा है। डीजल से क्रेशर प्लांट चलाने में क्रेशर संचालकों को भारी नुकसान होता है।