फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahoba News: भव्य शोभायात्रा के साथ कजली मेले का आगाज, उमड़ा जन समूह

Fri, 01 Sep 2023 12:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
विज्ञापन
विज्ञापन
महोबा। बुंदेलों की आन-बान-शान के प्रतीक ऐतिहासिक कजली मेले का गुरुवार को भव्य शोभायात्रा के साथ आगाज हो गया। हाथी, घोड़े व ऊंट के साथ आधा सैकड़ा से अधिक झांकियों ने लोगों का मन मोहा। हर सड़क, गली और सार्वजनिक स्थल पर लोगों की भीड़ नजर आई। शोभायात्रा के साथ कीरत सागर तट पर नौ दिन तक मेला लगेगा। दिन व रात के समय बुंदेली लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी शुरू हो गए।
विज्ञापन

शहर के हवेली दरवाजा स्थित शहीद स्थल से दोपहर तीन बजे कजली मेले की वर्षगांठ पर भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हमीरपुर-महोबा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, सदर विधायक राकेश गोस्वामी, डीएम मनोज कुमार, एसपी अपर्णा गुप्ता व पालिकाध्यक्ष संतोष चौरसिया ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। शोभायात्रा में हाथी पर सवार आल्हा, घोड़े पर सवार ऊदल और ब्रह्मा के अलावा अन्य वीर योद्धाओं के प्रतिरूप चलते रहे। जगह-जगह अश्वनृत्य के साथ कलाकारों ने विभिन्न करतब दिखाकर लोगों का दिल जीता। सबसे आगे सिर पर कलश धारण कर महिलाएं चलती रहीं।
शोभायात्रा में आल्हा-ऊदल के अलावा राजकुमारी चंद्रावलि का डोला, सखियों के साथ बाग में झूला झूलतीं रानी मछला, दक्षराज-बच्छराज, बेसिक शिक्षा विभाग की कायाकल्प से निपुण भारत कार्यक्रम की झांकी, जल सरंक्षण प्रदर्शनी, नशा मुक्ति, चंद्रयान-3, वीरांगना अवंतीबाई, उपदेश देते गौतम बुद्ध आदि की झांकी शामिल रहीं। मथुरा वृंदावन से आए कलाकारों ने राधा-कृष्ण व शिव-पार्वती की वेशभूषा में शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोहा। रामदरबार की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं।
विज्ञापन

शोभायात्रा हवेली दरवाजा से शुरु होकर तहसील चौराहा, मुख्य बाजार, ऊदल चौक, सुभाष चौक, खोयामंडी होते हुए कीरत सागर तट पहुंची। जहां भुजरियों का विसर्जन किया गया। शोभायात्रा और मेलास्थल पर लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटी रही। शोभायात्रा के साथ नौ दिन तक कीरत सागर तट पर बने आल्हा मंच व सांस्कृतिक मंच पर रंगारंग कार्यक्रम शुरू हो गए। शोभायात्रा के शुभारंभ पर अपर एसपी सत्यम, सीओ रामप्रवेश राय, समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी, राहुल अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन पुष्पा अनुरागी, सौरभ तिवारी, वैभव अरजरिया आदि मौजूद रहे।
कजली मेले की शोभायात्रा में तेज धूप व भीषण उमस भी लोगों का उत्साह नहीं डिगा सकी। जैसे-जैसे शाम ढलती गई मेलाप्रेमियों का उत्साह बढ़ता गया। युवाओं से लेकर महिलाओं, बच्चों और वृद्धों में भी जोश नजर आया। शोभायात्रा मार्ग के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। दूर-दराज व ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों ने दोपहर 12 बजे से ही शोभायात्रा मार्ग में अपनी जगह बना ली। भीड़ अधिक होने के चलते अभिभावक अपने छोटे-छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर शोभायात्रा दिखाते नजर आए।
शोभायात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों व मकानों की छतों के अलावा दीवारों पर चढ़कर लोगों ने शोभायात्रा का आनंद लिया। घंटों पहले से ही लोग और रिश्तेदार छत पर चढ़कर शोभायात्रा निकलने का इंतजार करते रहे। छतों पर भीड़ अधिक होने से किसी हादसे की आशंका को लेकर पुलिस उन्हें पीछे की ओर रहने के निदेश देती रही। ताकि कोई अनहोनी न हो सके।
कजली मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। शोभायात्रा के अलावा हर चौराहे पर पुलिस तैनात रही। सीओ रामप्रवेश राय स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले रहे। आधा किमी दूर से ही शहर में वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया। जाम की स्थिति नहीं बनी।
शोभायात्रा के दौरान मेलाप्रेमियों में सेल्फी खींचने और वीडियो बनाने का क्रेज दिखा। हर कोई हाथ में मोबाइल लेकर शोभायात्रा का वीडियो बनाकर अपने फेसबुक अकांउट व स्टेटस पर लगाते नजर आए। मेले को लेकर पुलिस ने भी चौकसी बरती। मेले की हर गतिविधि को कैद करने के लिए जगह-जगह तैनात पुलिस कमचारी ड्रोन कैमरों से वीडियोग्राफी करते रहे। इसके अलावा मेले में ड्रोन कैमरे से निगरानी रखी गई।
मेलास्थल कीरत सागर तट पर मेलाप्रेमियों का अपार जनसैलाब उमड़ा। जिससे लोगों को पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। मेले में महोबा के अलावा हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, मऊरानीपुर, राठ, मध्यप्रदेश के छतरपुर, सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह, सतना आदि से सैकड़ों की संख्या में मेलाप्रेमी आए। जिन्होंने कीरत सागर तट पर चल रहे दो सांस्कृतिक मंचों में कार्यक्रमों का आनंद लिया।
बारहवीं शताब्दी के चंदेल साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की स्मृतियों को संजोए ऐतिहासिक कजली मेला बुंदेलों की आन-बान-शान का प्रतीक है। सन् 1182 में दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा में चढ़ाई कर दी थी। रक्षाबंधन के दिन कीरत सागर तट पर भीषण युद्ध हुआ था। रक्षाबंधन के दूसरे दिन आल्हा-ऊदल ने दिल्ली सेना को खदेड़ दिया था। जिसके बाद से विजयोत्सव के रूप में कजली मेला लगता आ रहा है। मेले में शामिल होकर आल्हा-ऊदल की वीरता सुन लोग स्वयं को गौरवांवित महसूस करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें