महोबा। खटखट खटखट तेगा बाजे, छापर-छापर चले तलवार, बड़े लड़इया गढ़ महुबे के जिनसे हार गई तलवार... की गूंज गुरुवार को वीर आल्हा-ऊदल की नगरी महोबा में गूंजती रही। मौका था ऐतिहासिक कीरत सागर तट पर कजली मेले का। मेला परिसर में स्थित आल्हा मंच पर आल्हा गायकों ने आल्हा गायन पेश किया तो वहां मौजूद जनसैलाब की भुजाएं फड़क उठीं।
कजली मेले का पहला दिन आल्हा मंच पर पूरी तरह आल्हा गायकों के नाम रहा। आल्हा खंड में वर्णित महोबा के वीरों की महिमा का जमकर बखान हुआ। आल्हा सम्राट वंशगोपाल यादव ने आल्हा गायन पेश किया तो भारी संख्या में उपस्थित दर्शकों में अलग ही उत्साह नजर आया। उन्होंने आल्हा गायन के माध्यम से बताया कि किस तरह वीर आल्हा-ऊदल ने दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान की सेना को कीरत सागर तट पर हुए युद्ध में खदेड़ा था। इस दौरान आल्हा मंच पर पूरे दिन आल्हा गायन का सिलसिला चलता रहा। कभी तलवार भांजकर तो कभी वीर रस से ओतप्रोत सुर और लय के माध्यम से आल्हा गायन पेश किया गया। इसके अलावा अन्य आल्हा गायकों ने भी आल्हा मंच पर आल्हा गायन पेश किया। जिसे सुनकर दर्शकों ने आल्हा-ऊदल की वीरता को याद किया और महोबा के कीरत सागर तट का महत्व जाना।
कीरत सागर तट पर मेले के पहले दिन लोगों की भारी भीड़ जुटी। मेलाप्रेमियों ने झूलों व खेल तमाशों का जमकर आनंद उठाया। इस दौरान महिलाओं ने दुकानों से घरेलू उपयोग की सामग्री की जमकर खरीदारी की। नौ दिन तक चलने वाले मेले में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटेगी।