महोबा। बढ़ती डीजल की कीमतों ने ट्रक ऑपरेटरों और ट्रक संचालकों को व्यापारियों को हिलाकर रख दिया है। माल ढुलाई से लेकर उत्पादन तक इसका खासा असर पड़ा है। हालात ये है कि एक बार में एक हजार किमी आने-जाने मेें ट्रक का खर्च पांच हजार रुपये अतिरिक्त बढ़ गया है। डीजल की कीमत बढ़ने के बाद भी ट्रकों का भाड़ा नहीं बढ़ा। इससे ट्रक संचालकों को भारी नुकसान हो रहा है।
जिले में सिल्वर फैक्ट्री, जूता फैक्ट्री और क्रशर उद्योग चल रहे हैं। क्रशर से निकलने वाली गिट्टी की कीमत बढ़ी उल्टा डीजल की कीमतें 22 दिन से लगातार बढ़ रही है। जिससे पत्थर कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई-कई घंटे बढ़ा जनरेटर चलाकर गिट्टी बनाई जाती है। जिसमें डीजल भारी मात्रा में खर्च होता है। इससे उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही गिट्टी और अन्य सामान की कीमतों की लागत बढ़ गई है जबकि सामान की कीमत में कोई वृद्घि नहीं है। इससेे कारोबारियों को नुकसान हो रहा है।
ट्रक आपरेटर यूनियन के अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन का कहना है कि जब-जब डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। तब तक भाड़ा भी बढ़ा है लेकिन इस दफा 22 डीजल की कीमतों में वृद्धि होने के बाद भी ट्रकों का भाड़ा नहीं बढ़ाया गया। इससे ट्रक संचालकों को भारी नुकसान हो रहा है। ट्रक संचालक नासिर अंसारी का कहना है कि डीजल की कीमतें बढ़ने से अब होने वाला मुनाफा खत्म हो गया है। हालत यह है कि चालकों की तनख्वाह अब अपने पास से देनी पड़ रही है। 24 घंटे में एक चक्कर लगाने पर पांच से सात हजार रुपये मुनाफा होता था। अब डीजल बढ़ने से पांच हजार रुपये अतिरिक्त लागत आने लगी है। जिससे ट्रक मालिकों को नुकसान हो रहा है।