महोबा। प्रभारी जिला जज गजेंद्र कुमार ने बलात्कार के मामले में आरोपी को सात साल की सजा सुनाई, जबकि उसके चचेरे भाई पर दोष सिद्ध न होने पर अदालत ने बरी कर दिया। उधर एक अन्य अपहरण के मामले में आरोपी को चार साल की सजा सुनाई गई। दोनाें आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
शहर के मुहल्ला फतेहपुर बजरिया निवासी एजाज अहमद अपनी साली नजमा (16) को 24 सितंबर 2012 को भगाकर मुंबई ले गया था, जहां पर उसके साथ जबरन शादी की जिससे एक बच्ची का जन्म हुआ। पीड़िता के पिता मुन्ना ने घटना की रिपोर्ट अपने दामाद एजाज और उसके चचेरे भाई राजू के खिलाफ कोतवाली महोबा में मुकदमा दर्ज कराई थी। घटना के करीब तीन साल बाद प्रभारी जिला जज ने मुकदमे की सुनवाई करते हुए दोनाें पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद एजाज को बलात्कार का दोषी ठहराते हुए उसे सात साल की सजा और 6500 रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। जबकि उसके चचेरे भाई राजू पर दोष सिद्ध न होने पर बरी कर दिया। इस मुकदमे की पैरवी शासकीय अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह ने की। इसी तरह थाना महोबकंठ के ग्राम पिपरी में 12 जून 2011 को चौदह वर्षीय किशोरी रात्रि में पिता के साथ घर से बाहर शौचक्रिया के लिए गई थी। तभी पिता को दूर बैठाकर वह झाड़ियों में चली गई, जहां से ग्राम लिधौरा निवासी प्रहलाद किशोरी को अगवा कर ले गया। थोड़ी देर बाद पिता द्वारा बेटी को आवाज लगाने पर पर कोई जवाब न मिलने से बेटी को तलाशता रहा लेकिन बेटी के न मिलने पर पिता ने लिधौरा निवासी प्रहलाद उर्फ प्रेमनारायण के खिलाफ थाना महोबकंठ में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। प्रभारी जिला जज ने मंगलवार को दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद प्रहलाद को अपहरण का दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई साथ ही दो हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा मिलेगी। मुकदमे की पैरवी शासकीय अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह ने की। दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया गया है।