महोबा। विश्व के बढ़ते तापमान के दुष्प्रभावों से उपजे पर्यावरण संकट, खाद संकट, बंजर होती जमीन के कारणों पर विचार विमर्श के लिए शहर के चंद्रिका महिला महाविद्यालय में संगोष्ठी हुई। इसमें प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एस मुरलीधरन ने कहा कि तापमान में वृद्धि एक स्वत: चराचर प्रक्रिया है। वर्तमान में समूचा विश्व इस संकट का सामना कर रहा है। इस पर विचार करने की जरूरत है कि इस भीषण समस्या से किस प्रकाश छुटकारा मिले।
हमें कार्बन उत्सर्जन कम करना इस भीषण समस्या से छुटकारे का पहला जरूरी कदम होगा। संगोष्ठी में प्रख्यात वैज्ञानिक मुरलीधरन ने कहा कि अब विकास हमें पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए करना होगा। तभी हम इस समस्या से निपटने की आशा कर सकते हैं। यही समय की मांग भी है। डीआरडीए के पूर्व वैज्ञानिक विचित्र गंगवार ने कहा कि व्यक्ति के जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला। कहा कि देश के विकास में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जितनी बड़ी जिज्ञासा होगी, उतनी ही प्रयासों की सफलता निर्भर करती है।
इसके लिए उन्होंने आचरण की शुद्धता, भाव और विचारों की शुद्धता पर बल दिया। उन्होंने बायो टॉयलेट के महत्व और पर्यावरण में उसके योगदान का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र रावत ने कहा कि पर्यावरण का सवाल पूरे विश्व के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वर्तमान में जल, जंगल और जमीन पर संकट मंडरा रहा है। इन सबके पीछे सरकारों को दोष देना उचित नहीं है। हम भी इसमें बराबर के दोषी हैं। इस दौरान प्रख्यात वैज्ञानिक ने धुआं रहित चूल्हा बनाकर इसके उपयोग पर जोर दिया। कहा कि इससे न सिर्फ लकड़ी की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। यहां कॉलेज के प्रबंधक अरविंद सिंह कछवाह, डॉ. नितिन द्विवेदी के प्रवक्ता व छात्राएं मौजूद रहीं।