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दहेज हत्या के मामले में पति को दस साल की सजा

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महोबा। दहेज की मांग पूरी न होने पर युवती की जलाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने दो साल के अंदर फैसला सुनाते हुए पति को दस साल की सजा और छह हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। सास-ससुर पर दोष सिद्ध हो जाने पर आठ-आठ साल की सजा और चार-चार हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। देवर को निर्दोष पाकर बरी कर दिया।
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हमीरपुर के थाना मुस्करा के पहाड़ी निवासी हल्काई ने अपनी बेटी नवदा की शादी 23 मई, 2017 को जनपद महोबा के थाना कबरई के ग्राम लिलवाही निवासी नंदकिशोर उर्फ नंदू के बेटे अशोक से की थी। हल्काई ने हैसियत से ज्यादा दान-दहेज दिया था, लेकिन ससुरालीजन एक लाख रुपये नकद, सोने की जंजीर और बाइक की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर 25 फरवरी 2018 को ससुरालीजनों ने युवती के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर उसे मार डाला। मृतक के पिता ने 28 फरवरी 2018 को पति अशोक कुशवाहा, ससुर नंदकिशोर उर्फ नंदू कुशवाहा, सास बेनीबाई और देवर रामप्रकाश के खिलाफ कबरई थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
अपर जिला सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार राय ने गुरुवार को दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद पति अशोक कुशवाहा को दहेज हत्या में 10 साल की सजा, छह हजार रुपये का जुर्माना, दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो साल की सजा व चार हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी। ससुर नंदकिशोर, सास बेनीबाई को आठ-आठ साल की सजा और चार-चार हजार का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर दो-दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। मुकदमे की पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत और नीरज रावत ने बताया कि अदालत ने अभियुक्तों को पुलिस हिरासत में जेल भेजा है। दोष सिद्ध न होने पर देवर रामप्रकाश को बरी कर दिया गया।
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