महोबा। बुंदेलखंड में इस बार मानसून सत्र के दौरान हुई मूसलाधार बारिश से किसानों के अरमान पर पानी फिर गया है। खेतों में पानी भरने से अधिकांश किसानों की खरीफ की फसल डूब गई। इससे किसान परेशान हैं। अब किसान आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहे हैं। उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या आ खड़ी हुई है।
जनपद में खरीफ के दौरान मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, उड़द आदि की खेती की जाती है। जिले में खरीफ फसल की बुआई का लक्ष्य दो लाख हेक्टेयर है। इसमें से करीब एक लाख 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर खरीफ फसल की बुआई की जा चुकी है, जो लक्ष्य का 60 फीसदी है। पिछले दिनों जिले में मूसलाधार बारिश हुई थी। इससे किसानों के खेतों में भर गया। ऐसे में किसानों का बीज व मेहनत बर्बाद हो गई।
बुआई के बाद फसल बर्बाद होने से किसान मायूस हैं। उनकी बीज की लागत भी पानी में डूबकर बर्बाद हो गई। उधर, उप कृषि निदेशक रामसजीवन का कहना है कि इस बार बारिश ज्यादा हुई है।
मौसम साफ होने व खेतों के सूखने पर किसान अभी भी तोरिया की बुआई कर सकते हैं। राजस्व, कृषि विभाग व बीमा कंपनी की ओर से संयुक्त रूप से खेतों का सर्वेक्षण किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी ताकि जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है उनको आर्थिक सहायता मिल सके। साथ ही बारिश के चलते जो किसान बुआई नहीं सके उन्हें भी बीमा का लाभ मिल सके।