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Mahoba News: विरासत को मिलेगा नया कलेवर, संवरने लगा रामलीला मंच

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श्रीनगर (महोबा)। राजा मोहन सिंह की नगरी श्रीनगर में 125 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा इस बार नए रंग-रूप में नजर आएगी। सालों से भगवान राम की लीलाओं का साक्षी रहा रामलीला मंच अब संवरने लगा है। मंच पर टिनशेड निर्माण, रंग-रोगन व अन्य सुविधाओं के विकास का काम तेजी से चल रहा है। 20 अक्तूबर से शुरू होने वाली रामलीला को लेकर स्थानीय कलाकार सजीव मंचन के लिए दिन-रात अभ्यास में जुटे हैं।
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कस्बा श्रीनगर में रामलीला की शुरुआत वर्ष 1900 में रचनाकार और साहित्यकार पं. शिवराम पटैरिया ने की थी। उन्होंने रामलीला की रचना भी स्वयं की थी। उनके लिखे छंदों व संवादों में आज भी साहित्यिक छाप दिखाई देती है। वर्ष 1964 में उनके निधन के बाद वर्ष 1966 में प्रबुद्ध लोगों ने नवयुवक रामलीला मंडल की स्थापना कर इस परंपरा को आगे बढ़ाया। शिक्षक नाथूराम यादव, रामसेवक सैनी, जवाहरलाल सोनी समेत अन्य लोगों ने इसकी कमान संभाली।
अब मंडल की नई पीढ़ी इस विरासत को भव्य रूप देने में जुटी है। जिला पंचायत की ओर से मंच पर टिनशेड, विधायक निधि से बाहरी हिस्से में विकास कार्य व रामलीला समिति की ओर से रंग-रोगन कराया जा रहा है। कलाकारों के लिए ग्राम पंचायत शौचालय का निर्माण करा रही है। नवयुवक रामलीला मंडल के संरक्षक रतीश रावत ने बताया कि इस बार स्थानीय कलाकारों के साथ बाल कलाकार भी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 19 अक्तूबर को विधि-विधान से मुकुट पूजन किया जाएगा। 20 से 29 अक्तूबर तक रामलीला का मंचन होगा। 30 अक्तूबर को राम दरबार की शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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