महोबा/कुलपहाड़/श्रीनगर। जिले में बृहस्पतिवार की रात तेज आंधी के साथ करीब एक घंटे हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खासकर गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। रात के समय हुई बारिश से कई किसान अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटे रहे। मड़ाई के बाद खेतों में रखी फसल को बचाने के लिए किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर घर तक पहुंचाया। वहीं कई किसान बारिश में भीगते हुए फसल ढोते नजर आए।
जिले में इस बार करीब 2.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें बोई गई हैं। इनमें से एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर व 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल बोई गई। अन्य फसलें तो मड़ाई के बाद घर आ गईं लेकिन गेहूं की फसल अभी खेतों में ही पड़ी है। वर्तमान समय में अधिकांश स्थानों पर गेहूं की कटाई और मड़ाई का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खेतों में पड़ी कटी फसल भीग गई, इससे गेहूं के दाने के काले पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इससे न केवल उपज की गुणवत्ता प्रभावित होगी बल्कि किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलने में भी दिक्कत आ सकती है।
किसान रामदयाल, प्रीतम, देवीदीन आदि का कहना है कि अगर मौसम ऐसे ही खराब रहा तो उनकी पूरी मेहनत बेकार हो सकती है। हालांकि, कुछ किसानों ने सूझबूझ दिखाते हुए फसल को बचाने के प्रयास भी किए। उन्होंने खेतों में मड़ाई के लिए रखी गेहूं की फसल को पॉलिथीन से ढककर सुरक्षित करने की कोशिश की। इसके बावजूद तेज हवा और बारिश के चलते काफी हद तक नुकसान हुआ।
कुलपहाड़ संवाद के अनुसार रात के समय हुई बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बारिश के दौरान अधिकांश किसान फसलों को बचाने में जुटे रहे। कुछ किसानों की फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर दरवाजे आ गई। किसान भीगते हुए गेहूं को मकान के अंदर रखवाते नजर आए। किसान हरीशंकर, जयकरण, महेश, बरदानी आदि ने बताया कि फसलें गीली होने से थ्रेसिंग बंद हो गई है। मौसम खुलने पर पहले फसलें सूखेंगी, फिर मड़ाई हो पाएगी। ऐसे में दाना काला पड़ सकता है। श्रीनगर संवाद के अनुसार रात को एक घंटे तक तेज बारिश से किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। खेतों में मड़ाई के लिए रखी फसलों को बचाने के लिए किसान पॉलिथीन ढकते नजर आए। किसानों ने 20 से 30 फीसदी फसलों में नुकसान की बात कही है।
किसानों ने बयां किया दर्द
आंधी-बारिश से होना नुकसान
श्रीनगर के मोहल्ला देवबाग निवासी किसान अखिलेश कुमार का कहना है कि नौ बीघा जमीन बलकट पर लेकर खेत में गेहूं व चने की फसल की बोई थी। फसल इस समय पककर तैयार है लेकिन आंधी-बारिश से भारी नुकसान हुआ है। फसल गीली होने से अब दाना प्रभावित होगा। ऐसे में बलकट का रुपया चुकाना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
तीन दिन में सूख पाएगी फसल
श्रीनगर के मोहल्ला बांसपहाड़िया के किसान सुधीर कुमार सोनी का कहना है कि बारिश होने से खेत में रखी फसल भीग गई। सुबह उन्होंने दो हजार रुपये की पॉलिथीन खरीदी है। ताकि, दोबारा बारिश होने पर फसल को बचाया जा सके। धूप निकलने के बाद तीन दिन में फसल सूख पाएगी। तब जाकर मड़ाई का काम शुरू हो पाएगा।
नुकसान का प्रशासन दिलाए मुआवजा
तहसील कुलपहाड़ के लाड़पुर के किसान करन राजपूत का कहना है कि लगातार मौसम खराब रहने से किसान परिवार समेत दिन-रात खेतों में मेहनत कर रहे हैं। देर रात बारिश ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया। फसल सुखाकर थ्रेसिंग कराना पड़ेगी। इसमें काफी श्रम और रुपया खर्च होगा। बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का प्रशासन मुआवजा दिलाए।
कोट आंधी की वजह से कुछ स्थानों पर कटी रखी फसल उड़ गई जबकि बारिश में जो फसल भीगी है, उसे सुखाने के लिए किसानों को सलाह दी गई है। जिन किसानों को नुकसान हुआ है, वह बीमा कंपनी के टोलफ्री नंबर पर सूचित कर व्यक्तिगत दावा कर सकते हैं। सर्वे कराकर बीमा कंपनी नुकसान की भरपाई करेगी। -दुर्गेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी, महोबा।